डीवाई चंद्रचूड़ ने संस्थाओं को मजबूत बनाने पर दिया जोर, सरकारी अस्पतालों का किया जिक्र

HIGHLIGHTS
- पूर्व सीजेआई ने देश की प्रगति के लिए सरकारी और निजी संस्थानों को सशक्त बनाने की बात कही।
- दूर-दराज के क्षेत्रों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों का जिक्र करते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर दिया।
- जस्टिस संजय किशन कौल ने अपनी आत्मकथा में न्यायिक नियुक्तियों से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख किया।
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि किसी भी समाज और विशेष रूप से लोकतंत्र में संस्थाओं की भूमिका बेहद अहम होती है। देश की प्रगति और विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सरकारी और निजी, दोनों क्षेत्रों के संस्थानों को बनाए रखना और मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा संस्थाओं को सशक्त बनाने के साथ उनकी क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए।
पूर्व सीजेआई का यह बयान ऐसे समय आया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और चुनाव आयोग में कथित अनियमितताओं को लेकर देश में राजनीतिक विवाद चल रहा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन ने सीईसी के खिलाफ सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक प्रदर्शन किए हैं।
सार्वजनिक अस्पतालों को मजबूत बनाने की जरूरत बताई
स्वास्थ्य सेवाओं पर बात करते हुए पूर्व सीजेआई ने सरकारी अस्पतालों की अहमियत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “मरीजों की देखभाल और उनके कल्याण के मामले में सरकारी अस्पतालों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इन अस्पतालों में ऐसे लोग इलाज कराने आते हैं, जिन्हें वास्तव में चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे मरीज भी शामिल हैं, जो दूर-दराज के इलाकों से इलाज के लिए पहुंचते हैं।”
चंद्रचूड़ ने कहा कि इस स्थिति को देखते हुए सरकारी अस्पतालों और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत तथा अधिक सक्षम बनाने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने जोर दिया कि देश के विकास के लिए अहम संस्थानों को बनाए रखने के साथ उनकी कार्यक्षमता और मजबूती बढ़ाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जाने चाहिए।
पूर्व सीजेआई के कार्यकाल को लेकर जस्टिस संजय किशन कौल के दावे
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस संजय किशन कौल ने अपनी आत्मकथा ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ में डीवाई चंद्रचूड़ के मुख्य न्यायाधीश के कार्यकाल से जुड़ी कुछ घटनाओं का उल्लेख किया है।
कौल ने दावा किया कि न्यायिक नियुक्तियों के लिए प्रस्तावित नामों पर कॉलेजियम की औपचारिक बैठक होने से पहले ही चंद्रचूड़ सरकार से चर्चा करते थे। इस प्रक्रिया को लेकर दोनों के बीच मतभेद थे।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2023 में सेवानिवृत्त हुए जस्टिस कौल का मानना था कि कॉलेजियम में चर्चा से पहले सरकार की सहमति लेना गलत संदेश देता है। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया से न्यायिक नियुक्तियों में सरकार के प्रभाव की आशंका भी बढ़ सकती है।
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