शेयर बाजार में भारी बिकवाली, सेंसेक्स 125 अंक गिरा और निफ्टी 22,600 पर बंद

HIGHLIGHTS
- ब्रेंट क्रूड की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची।
- विदेशी निवेशकों ने गुरुवार को 3,458.70 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
- घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 2,891.32 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की।
नई दिल्ली। शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत मजबूती के साथ हुई, लेकिन दोपहर में अचानक बिकवाली बढ़ने से बाजार दबाव में आ गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की कमजोरी बढ़ाई।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी करीब एक प्रतिशत तक गिर गए। हालांकि, आखिरी घंटों में बाजार ने कुछ सुधार किया, लेकिन दोनों प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 125.56 अंक टूटकर 73,123.83 पर और निफ्टी 87.66 अंक गिरकर 22,600 पर बंद हुआ। वहीं, रुपया लगातार दूसरे कारोबारी दिन कमजोर होकर 94.93 (प्रोविजनल) प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट आई?
शुक्रवार को बाजार ने शुरुआत बढ़त के साथ की थी, लेकिन दोपहर तक बिकवाली हावी हो गई। बीएसई और एनएसई के प्रमुख सूचकांकों में कारोबार के दौरान तेज गिरावट दर्ज की गई।
सेंसेक्स: शुरुआती बढ़त गंवाने के बाद 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 730.30 अंक यानी एक प्रतिशत गिरकर 72,519.09 के निचले स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, कारोबार के अंत में इसमें कुछ सुधार हुआ और यह 125.56 अंक गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ।
निफ्टी: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 भी दबाव में रहा। यह कारोबार के दौरान 260.75 अंक यानी 1.15 प्रतिशत फिसलकर 22,426.90 के स्तर पर आ गया। अंत में निफ्टी 87.66 अंक की गिरावट के साथ 22,600 पर बंद हुआ।
लगातार गिरावट: इससे पहले गुरुवार को भी सेंसेक्स 460.30 अंक गिरकर 73,249.39 और निफ्टी 123.70 अंक टूटकर 22,687.65 पर बंद हुआ था। यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र था, जब बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ।
बाजार में बिकवाली क्यों बढ़ी?
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, घरेलू शेयर बाजार ने सकारात्मक रुख के साथ कारोबार शुरू किया था, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता ने तेजी को बरकरार नहीं रहने दिया। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से निवेशकों की चिंता बढ़ी, जबकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला।
गिरावट के पीछे रहे ये प्रमुख कारण
ब्रेंट क्रूड 114 डॉलर के पार: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब एक प्रतिशत बढ़कर 114 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली: गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 3,458.70 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिक्री की। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 2,891.32 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की।
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट रही?
शुक्रवार के कारोबार में सेंसेक्स के शेयरों में टाटा स्टील सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वालों में शामिल रहा। इसके शेयर में पांच प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
गिरावट वाले प्रमुख शेयर: टाटा स्टील के अलावा अदाणी पोर्ट्स, टाइटन, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), एनटीपीसी, इंडिगो, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फिनसर्व और बजाज फाइनेंस में भी बिकवाली देखने को मिली।
बढ़त वाले शेयर: बाजार में कमजोरी के बावजूद इटरनल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इंफोसिस, लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) और एचडीएफसी बैंक बढ़त के साथ कारोबार करते रहे।
वैश्विक बाजारों का क्या रहा रुख?
शुक्रवार को वैश्विक बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। एशियाई बाजारों ने शुरुआती नुकसान से उबरते हुए सुधार दर्ज किया। शंघाई का एसएसई कंपोजिट, हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि, जापान का निक्केई-225 गिरावट में रहा।
दूसरी ओर, यूरोपीय बाजारों में शुक्रवार को कमजोरी रही। अमेरिकी शेयर बाजार भी गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।
चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर के अनुसार, हालिया बाजार गतिविधियां निचले स्तरों पर सतर्क खरीदारी का संकेत देती हैं। हालांकि, एफआईआई की लगातार बिकवाली और बढ़ती अस्थिरता के कारण कारोबारियों को चुनिंदा शेयरों पर ध्यान देना पड़ सकता है। उनके मुताबिक, वैश्विक दबाव के बीच बाजार शुरुआती बढ़त को कितना बनाए रख पाता है, यह आगे की दिशा तय करने में अहम होगा।
आगे बाजार के लिए क्या हैं चुनौतियां?
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया में जारी संकट और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली निकट अवधि में भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं। विश्लेषकों के अनुसार, जब तक कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती और विदेशी पूंजी की निकासी पर रोक नहीं लगती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है।
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