जी-रामजी योजना: सिर्फ इन महिलाओं को मिलेगा ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड

नई दिल्ली: ग्रामीण भारत में रोजगार, सम्मान और सुरक्षा को एक साथ जोड़ने के उद्देश्य से लाए गए विकसित भारत-जी-रामजी अधिनियम में महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इस कानून के तहत कुल लाभार्थियों में महिलाओं की कम से कम एक तिहाई हिस्सेदारी सुनिश्चित की गई है।
पंजीकरण और रोजगार वितरण
अधिनियम केवल घोषणा तक सीमित नहीं रहेगा। पंजीकरण से लेकर काम आवंटन, पहचान, भुगतान, निगरानी और शिकायत निवारण तक पूरी प्रक्रिया स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई है। यदि इसका सही पालन हुआ, तो यह ग्रामीण महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक रोजगार का मॉडल बन सकता है।
ग्रामीण रोजगार गारंटी के लिए परिवार का पंजीकरण करते समय सभी वयस्क सदस्यों के नाम दर्ज किए जाएंगे। इसमें पत्नी, बेटी या परिवार की मुखिया शामिल होंगी, जिन्हें अलग से आवेदन करने या दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पंजीकरण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की होगी, जिससे अनावश्यक परेशानी नहीं होगी।
अकेली रहने वाली महिलाओं, विधवा, परित्यक्ता और अविवाहित महिलाओं के लिए विशेष ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी किया जाएगा। इन कार्डों के आधार पर उन्हें रोजगार में प्राथमिकता मिलेगी।
महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान
अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं को स्थायी आर्थिक सहारा प्रदान करना है। इन विशेष कार्डों की वैधता तीन वर्ष की होगी। ग्राम पंचायतों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे क्षेत्र की अकेली या आय के स्थायी साधन न रखने वाली महिलाओं की पहचान करें और उन्हें रोजगार गारंटी कार्ड उपलब्ध कराएं।
महिला प्रधान परिवारों को भी प्राथमिकता दी गई है। इन परिवारों को ऐसे कामों में रखा जाएगा, जो भविष्य में स्थायी आय के साधन विकसित करें। खेत, तालाब, सिंचाई संरचनाएं, भूमि सुधार, आवास और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य न केवल तत्काल मजदूरी देंगे, बल्कि लंबी अवधि के लाभ वाली संपत्तियां भी तैयार करेंगे।
सुविधाजनक और सुरक्षित कार्यस्थल
महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ कार्यस्थल पर उनकी सुविधा और गरिमा का भी ध्यान रखा गया है। काम के पास पीने के पानी, शौचालय, विश्राम स्थल और बच्चों की देखभाल की व्यवस्था अनिवार्य होगी। इससे महिलाएं परिवार और रोजगार के बीच संतुलन बनाए रख सकेंगी।
मजदूरी सीधे महिला के बैंक या डाकघर खाते में भेजी जाएगी, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और वे अपनी मेहनत की पूरी कमाई समय पर पा सकेंगी। साथ ही, शिकायत निवारण की भी व्यवस्था है और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
गांव, ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर निगरानी और सामाजिक अंकेक्षण की व्यवस्था की गई है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि महिलाओं की हिस्सेदारी किसी भी स्तर पर एक तिहाई से कम न हो।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.