जालौन में IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही का बयान वायरल, भगत सिंह पर टिप्पणी से मचा विवाद

HIGHLIGHTS
- उरई कलक्ट्रेट सभागार में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम आयोजित हुआ था।
- कार्यक्रम में आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने संबोधन दिया।
- उनके संबोधन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
जालौन। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जालौन के उरई कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित कार्यक्रम में आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही के संबोधन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में वह शहीद-ए-आजम भगत सिंह पर टिप्पणी करते सुनाई दे रहे हैं। वीडियो में उन्हें यह कहते सुना जा सकता है कि आज के समय के हिसाब से भगत सिंह सबसे बड़े बेवकूफ थे और वह कभी अच्छे बच्चे नहीं थे।
हालांकि, वायरल वीडियो में सामने आए अंश से उनकी पूरी टिप्पणी का संदर्भ स्पष्ट नहीं हो सका है। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कुछ लोगों ने इसे शहीद भगत सिंह का अपमान बताते हुए नाराजगी जताई है, जबकि कुछ लोग पूरे संबोधन और टिप्पणी के संदर्भ को लेकर चर्चा कर रहे हैं। भगत सिंह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख क्रांतिकारियों में शामिल थे।
बयान ने स्थानीय स्तर पर भी चर्चा छेड़ी
भगत सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया था और महज 23 वर्ष की उम्र में शहादत दी थी। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उनके व्यक्तित्व और योगदान को लेकर सामने आए कथित बयान ने स्थानीय स्तर पर भी चर्चा छेड़ दी है।
तहसीलदार और नायब तहसीलदार पर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति
उपजिलाधिकारी (न्यायिक) उरई रिंकू सिंह राही ने तहसीलदार शिरीश कुमार मिश्र और नायब तहसीलदार राहुल यादव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है। यह संस्तुति राजस्व वाद की सुनवाई के दौरान नियमों का पालन नहीं करने के मामले में की गई है।
एसडीएम न्यायिक ने दोनों अधिकारियों की आख्या को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के नियमों के विपरीत पाया है। उन्होंने कार्रवाई के लिए मामला राजस्व परिषद, लखनऊ को भेजा है। साथ ही अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को भी पत्र भेजा गया है।
यह मामला वाद संख्या टी-202606350305945, भगीरथ बनाम अमर सिंह से जुड़ा है। यह वाद उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 116 के तहत दर्ज हुआ था। वाद मौजा बड़ेरा, परगना उरई से संबंधित है। इसे 27 अप्रैल 2026 को दाखिल किया गया था।
इसकी पहली सुनवाई भी 27 अप्रैल को हुई थी। दूसरी सुनवाई दो मई और तीसरी सुनवाई 22 मई को हुई। इसके बाद मामला न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया। न्यायालय ने तहसीलदार और नायब तहसीलदार से संबंधित प्रक्रिया पर आख्या मांगी थी।
न्यायालय की आख्या में नियमों की अनदेखी का मामला
तहसीलदार शिरीश कुमार मिश्र ने पांच अगस्त को अपनी आख्या प्रस्तुत की। नायब तहसीलदार राहुल यादव ने भी पांच अगस्त को अपनी आख्या दी थी। एसडीएम न्यायिक के पत्र में कहा गया है कि अधिकारियों ने कुर्रा तैयार करने में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2016 के नियमों के पालन की बात कही।
वहीं, संबंधित पत्रावली में कुर्रा आज तक प्रस्तुत नहीं किया गया था। आख्या में इसकी वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट नहीं की गई थी। न्यायालय ने इस चूक को गंभीरता से लिया है। यदि कुर्रा प्रस्तुत नहीं हुआ और नियमों के पालन की आख्या दी गई, तो यह राजस्व कार्रवाई में गंभीर लापरवाही है। इससे राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठते हैं।
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