अंतरराष्ट्रीय जिहादी साजिश का भंडाफोड़, ग्रेटर नोएडा से भारी साहित्य बरामद

फरीदाबाद: जिस तरह फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में धार्मिक उन्माद फैलाने का काम किया जा रहा था, ठीक उसी तरह ग्रेटर नोएडा के साइट-5 औद्योगिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कट्टरपंथी साहित्य छापा जा रहा था।
आतंकी साजिश से जुड़ी कड़ी
दिल्ली के लाल किला धमाके की जांच में यह पता चला है कि यूनिवर्सिटी के कुछ डॉक्टरों का इसमें लिंक है। ये लोग धार्मिक उन्माद फैलाने के साथ ही किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने की साजिश में भी थे। ग्रेटर नोएडा में छापी गई सामग्री नोएडा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, बरेली और मुंबई में भेजी गई।
जानकारी के अनुसार लगभग 27.50 लाख किताबें अफ्रीका के तंजानिया और अन्य देशों में भेजी जा रही थीं। फंडिंग के स्रोत तुर्की से जुड़ी बताई जा रही है। इस पूरी गतिविधि को इस्तांबुल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और हकीकत ऑफसेट एंड पब्लिशर्स लिमिटेड के नाम पर चलाया जा रहा था।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का संदेह
पुलिस ने बताया कि इस फैक्ट्री में तुर्की और बांग्लादेश से भी लोग आते थे, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क चलाने का संकेत मिलता है। यूपी एटीएस ने पिछले शनिवार को दिल्ली निवासी कंपनी के सह-निदेशक फरहान नबी सिद्दीकी को गिरफ्तार किया।
सात वर्षों में करोड़ों रुपये की सामग्री छापी
जांच में सामने आया कि फरहान ने पिछले सात वर्षों में लगभग 2.10 करोड़ रुपये की उन्मादी किताबें छापी। इनमें से 27.50 लाख किताबें अफ्रीकी बाजार में भेजी गई। इसके लिए उन्होंने लगभग 19 लाख रुपये जीएसटी के रूप में चुकाए।
कानूनी आड़ के तहत ऑपरेशन
जीएसटी रेकॉर्ड के अनुसार, फरहान ने 20 फरवरी 2029 को साइट-5, ग्रेटर नोएडा में इस्तांबुल इंटरनेशनल फर्म पंजीकृत कराई और हकीकत प्रिंटिंग प्रेस, हजरत निजामुद्दीन, दिल्ली से किताबों का अवैध प्रकाशन शुरू किया। ये किताबें दिल्ली-एनसीआर, गाजियाबाद, बरेली और मुंबई में बेची गईं।
इस्तांबुल इंटरनेशनल के नाम पर मध्य प्रदेश और दिल्ली से कृषि बीजों की खरीदारी भी की गई, जो छिपे हुए कारोबार की आड़ थी।
दूसरी फर्म के जरिए कारोबार बढ़ाने की कोशिश
फरहान ने 23 दिसंबर 2024 को उसी पते पर रियल ग्लोबल एक्सप्रेस लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड पंजीकृत कराई। इस फर्म के जरिए एयरपोर्ट ऑपरेशंस और पोस्टल सेवाओं के लिए तैयारी की जा रही थी। पिछले एक साल में इस फर्म ने कोई उत्पाद नहीं बेचा, लेकिन अश्वगंधा, शिलाजीत और शतावरी जैसी दवाइयों की खरीदारी की, जिसका अनुमानित मूल्य 2.99 लाख रुपये बताया गया।
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