सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत पर केजरीवाल, स्टालिन और राहुल गांधी ने जताई नाराजगी

HIGHLIGHTS
- सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
- अरविंद केजरीवाल ने कार्रवाई को बेतुका बताया।
- एमके स्टालिन ने दोनों कार्यकर्ताओं को कानूनी सहायता देने की पेशकश की।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे बेतुका बताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, 'क्या अपने ही देश में अपना झंडा लहराना अपराध है? यह बिल्कुल बेतुका है।'
स्टालिन ने कानूनी सहायता देने की पेशकश की
तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के अध्यक्ष एमके स्टालिन ने भी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल किया कि सरकार आखिर कितने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेगी और कितने युवाओं की आवाज दबाएगी?
स्टालिन ने कहा कि युवाओं को जेल भेजने से आम लोग भी विरोध के लिए सड़कों पर उतर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी सौरव रांका और सौरव दास को जरूरी कानूनी सहायता देने के लिए तैयार है।
आदित्य ठाकरे ने पूछा- युवाओं को तिरंगा पकड़ने पर जेल क्यों?
शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने भी इस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने एक्स पर लिखा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा पकड़ने के लिए सौरव दास और आशुतोष रांका को जेल भेज दिया गया है।
ठाकरे ने सवाल किया कि अपने ही देश में राष्ट्रीय ध्वज पकड़ना युवाओं के लिए अपराध कब से हो गया? उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों और देशभक्त युवाओं के बीच यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक लोकतंत्र को दोबारा हासिल नहीं कर लिया जाता।
राहुल गांधी ने न्यायिक हिरासत को बताया कायरता
इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी दोनों कार्यकर्ताओं को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। राहुल गांधी ने युवाओं को जेल भेजने की कार्रवाई को कायरता बताया।
उन्होंने कहा कि छात्र, युवा, पत्रकार और विपक्षी गठबंधन भले ही अलग-अलग बैनर के तहत हों, लेकिन सभी अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जंतर-मंतर देश की जनता का है और इसे वापस हासिल किया जाएगा।
'हम डरने वाले नहीं हैं': अजिंक्य शिंदे
सीजेपी के सदस्य अजिंक्य शिंदे के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। इसके बाद दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
शिंदे ने कहा कि इस कार्रवाई से पार्टी के कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं। विपक्षी नेताओं के बयानों के बाद इस मामले में राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रदर्शन करने और विरोध के अधिकार को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
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