केरलम विधानसभा में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पारित, नियुक्ति पैनल बदलने की मांग

HIGHLIGHTS
- प्रस्ताव में मतदाता सूची के SIR के दौरान कथित अनियमितताओं पर चिंता जताई गई।
- विधानसभा के तीन भाजपा सदस्यों ने प्रस्ताव का विरोध किया।
- भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने प्रस्ताव पारित किए जाने पर सवाल उठाए।
केरलम। केरलम विधानसभा में चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर लगाए गए आरोपों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति में बदलाव की मांग वाला प्रस्ताव पारित हो गया। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की ओर से पेश किए गए इस प्रस्ताव को संशोधनों के साथ मंजूरी दी गई। हालांकि, विधानसभा के तीन भाजपा सदस्यों ने इसका विरोध किया।
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने पेश किया प्रस्ताव
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने सोमवार को विधानसभा में यह प्रस्ताव रखा। इसमें मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान कथित अनियमितताओं पर चिंता जताई गई। प्रस्ताव में कहा गया कि बिना स्पष्ट नियमों या पूर्व सूचना के पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के आरोप सामने आए हैं।
मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर क्या आरोप लगे?
प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में तकनीकी हेरफेर और अनियमितताओं के कारण हाशिए पर रहने वाले समुदायों, अल्पसंख्यकों, प्रवासी श्रमिकों और युवा मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित होने का खतरा है।
प्रस्ताव में चुनाव आयोग के कामकाज पर क्या सवाल उठाए गए?
प्रस्ताव में मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया कि चुनाव आयोग ने सॉफ्टवेयर सिस्टम के माध्यम से मतदाता सूची तैयार करने वाले इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स की शक्तियां कम कर दी हैं। साथ ही, मौजूदा नियमों के विपरीत फॉर्म-6 में संशोधन किए जाने की बात भी कही गई।
इसमें उन मीडिया रिपोर्टों का भी उल्लेख किया गया, जिनमें दावा किया गया था कि आयोग के अधिकांश सदस्यों ने इन कदमों पर असहमति जताई थी।
प्रस्ताव में चुनाव आयोग से कथित अनियमितताओं को दूर करने और मतदाता सूची से हटाए गए सभी पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार बहाल करने की मांग की गई।
मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करने वाले पैनल में बदलाव की मांग
प्रस्ताव में कहा गया कि संवैधानिक संस्था होने के नाते चुनाव आयोग को निष्पक्षता के साथ और सरकार के प्रभाव से स्वतंत्र होकर काम करना चाहिए। इसमें यह भी कहा गया कि मतदाता सूची में कथित हेरफेर से चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा कमजोर होता है।
इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति के पुनर्गठन की मांग की गई। प्रस्ताव में सुझाव दिया गया कि इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाए।
केरलम भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने क्या कहा?
केरलम भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित किए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'आज केरलम विधानसभा में हमने एक बहुत ही अजीब नजारा देखा। सीपीएम और कांग्रेस के 137 विधायक, जो आम तौर पर एक-दूसरे के विरोधी होने का दावा करते हैं, उन्होंने मिलकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक गैर-कानूनी प्रस्ताव पास किया। यह राहुल गांधी की धोखेबाजी वाली राजनीति का एक और उदाहरण है।
मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है और विधानसभा ने सभी स्थापित नियमों का उल्लंघन करते हुए इस मामले पर कार्रवाई की है। आज यह साफ है कि कांग्रेस पार्टी, और खासकर वीडी सतीशन, लोगों का ध्यान भटकाने के लिए बेताब हैं। भारतीय लोकतंत्र की अखंडता के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है।'
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