जमीन घोटाला केस: अल-फलाह यूनिवर्सिटी चांसलर 3 दिन की पुलिस रिमांड पर

दक्षिणी दिल्ली के साकेत कोर्ट में 45 करोड़ रुपये की जमीन की कथित फर्जी खरीद-फरोख्त मामले ने शनिवार को एक नया मोड़ ले लिया। अदालत ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया है।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर रिमांड की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। इससे पहले वह मनी लॉन्ड्रिंग मामले में न्यायिक हिरासत में थे।
जमानत याचिका पहले ही हो चुकी थी खारिज
जानकारी के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग केस में जवाद अहमद सिद्दीकी की जमानत याचिका साकेत कोर्ट द्वारा दो बार खारिज की जा चुकी है। पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें 1 मई को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान के समक्ष पेश किया गया था। जांच एजेंसियों ने अदालत से और समय की मांग करते हुए कहा कि मामले में अभी कई अहम सबूत जुटाने बाकी हैं, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया।
ईडी की कार्रवाई और गिरफ्तारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जवाद अहमद सिद्दीकी को 24 मार्च को तिहाड़ जेल से गिरफ्तार किया था। यह उनके खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा दूसरा मामला बताया जा रहा है। जांच अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े अन्य संस्थानों से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं पर केंद्रित है।
इसके अलावा अल-फलाह ग्रुप की जांच 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके से जुड़े मामलों में भी की जा रही है। ईडी पहले ही 17 जनवरी को इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन हड़पने का आरोप
जांच में सामने आया है कि दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के मदनपुर खादर गांव स्थित खसरा नंबर 792 की करीब 1.146 एकड़ जमीन को कथित रूप से धोखाधड़ी के जरिए अपने नाम कराया गया। ईडी का आरोप है कि जवाद अहमद सिद्दीकी ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए।
इस जमीन की मौजूदा बाजार कीमत लगभग 45 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जबकि दस्तावेजों में इसकी कीमत केवल 75 लाख रुपये दर्शाई गई थी। जांच एजेंसियां अब पूरे वित्तीय लेन-देन और इस मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच में जुटी हुई हैं।
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