सीएम पद से इस्तीफा न देने पर अड़ीं ममता, जेठमलानी बोले- होनी चाहिए कार्रवाई

पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पद पर बने रहने को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनके फैसले को लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया है।
एक इंटरव्यू के दौरान महेश जेठमलानी ने कहा कि जैसे ही चुनाव आयोग द्वारा परिणामों की आधिकारिक पुष्टि हो जाती है, उसके बाद मुख्यमंत्री के रूप में पद पर बने रहना उचित नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, इस स्थिति में ममता बनर्जी को स्वयं इस्तीफा दे देना चाहिए था।
उन्होंने आगे कहा कि यदि ऐसा नहीं होता है तो राज्यपाल के पास संवैधानिक विकल्प मौजूद हैं, जिसके तहत उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। यहां तक कि आवश्यक होने पर कानून-व्यवस्था की प्रक्रिया का सहारा भी लिया जा सकता है।
ममता बनर्जी का पलटवार
दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने चुनाव नहीं हारा है, इसलिए इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी की करीब 100 सीटें जानबूझकर प्रभावित या ‘छीन ली गईं’ हैं।
उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए सरकार पर पक्षपात के आरोप लगाए हैं। हालांकि महेश जेठमलानी ने कहा कि यदि उनके पास ठोस सबूत हैं तो उन्हें अदालत का रुख करना चाहिए।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया भी आई सामने
इस मुद्दे पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं तो संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई संभव है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि होता है और सभी नेताओं को इसे स्वीकार करना चाहिए।
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