ममता बनर्जी का इस्तीफा न देना लोकतंत्र की लड़ाई: संजय राउत

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पद से इस्तीफा न देने के फैसले को शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने खुलकर समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि यह कदम केवल सत्ता से जुड़ा निर्णय नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संस्थागत व्यवस्था के खिलाफ एक प्रतीकात्मक विरोध है।
ममता के फैसले को बताया लोकतांत्रिक संघर्ष
संजय राउत ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ममता बनर्जी का रुख केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। उनके मुताबिक, यह मामला केवल राजनीतिक हार-जीत का नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश में चुनावी व्यवस्था पर पक्षपात के सवाल लगातार उठ रहे हैं और इस पर विपक्षी दलों को एकजुट होकर विचार करना चाहिए।
चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
राउत ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि संस्था की निष्पक्षता को लेकर चिंता बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर विपक्ष लंबे समय से सवाल उठा रहा है, लेकिन अब स्थिति और गंभीर हो गई है।
उनका कहना था कि विपक्षी दलों को यह तय करना होगा कि मौजूदा परिस्थितियों में चुनावी प्रक्रिया में किस तरह आगे बढ़ा जाए।
चुनाव परिणाम और राजनीतिक स्थिति
गौरतलब है कि हालिया विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से भाजपा को 207 सीटें मिलीं, जबकि तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई। नतीजों के बाद ममता बनर्जी ने इसे जनादेश मानने से इनकार करते हुए इसे साजिश करार दिया और मुख्यमंत्री पद छोड़ने से भी इंकार कर दिया।
महाराष्ट्र का उदाहरण भी दिया
संजय राउत ने अपने बयान में 2022 के महाराष्ट्र राजनीतिक घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय की परिस्थितियों से भी यह संकेत मिलता है कि राजनीतिक संकट के दौरान फैसलों का असर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ता है।
उन्होंने बताया कि उद्धव ठाकरे ने ममता बनर्जी से बातचीत कर उन्हें समर्थन दिया है और कई विपक्षी दलों ने भी उनके साथ एकजुटता दिखाई है।
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