मुजफ्फरनगर: 65 साल के हरपाल नाथ की अनोखी कांवड़ यात्रा, घुटनों के बल 2400 किमी का सफर करेंगे तय

HIGHLIGHTS
- हरपाल नाथ चार पहियों वाली विशेष रेहड़ीनुमा कांवड़ को हाथों से खींच रहे हैं।
- यात्रा के दौरान वह संभलहेड़ा शिवधाम, महाकालेश्वर और पशुपतिनाथ मंदिर जाएंगे।
- श्रद्धालु रास्ते में उन्हें भोजन, पानी और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।
मुजफ्फरनगर। कांवड़ यात्रा-2026 के दौरान रविवार रात मुजफ्फरनगर में एक अनोखी कांवड़ यात्रा श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बन गई। मेरठ निवासी 65 वर्षीय शिवभक्त हरपाल नाथ हरिद्वार से 33 लीटर पवित्र गंगाजल लेकर घुटनों के बल रेंगते हुए अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं। उनकी कठिन साधना और समर्पण को देखकर राहगीर और श्रद्धालु भावुक हो उठे।
हरपाल नाथ सामान्य कांवड़ की जगह चार पहियों वाली विशेष रेहड़ीनुमा कांवड़ को हाथों के सहारे खींचते हुए आगे बढ़ रहे हैं। इसी कांवड़ में गंगाजल के साथ उनकी जरूरत का सामान भी रखा हुआ है। कांवड़ पर बाबा भोलेनाथ की ध्वजा के साथ तिरंगा भी लगा हुआ है, जो आस्था के साथ देशभक्ति का संदेश दे रहा है।
लोगों ने रुककर देखा, वीडियो बनाए और चरण स्पर्श किए
मुजफ्फरनगर से गुजरने के दौरान बड़ी संख्या में लोग हरपाल नाथ को देखने के लिए रुक गए। कई लोगों ने उनकी यात्रा का वीडियो बनाया, वहीं कई श्रद्धालुओं ने उनके चरण छूकर उनका हौसला बढ़ाया। घुटनों के बल धीरे-धीरे आगे बढ़ती उनकी यात्रा लोगों के लिए आस्था और संकल्प की मिसाल बन गई।
411 दिनों में पूरी करेंगे 2400 किलोमीटर की यात्रा
हरपाल नाथ ने बताया कि यह उनकी तीसरी कठिन कांवड़ यात्रा है। इस बार वह करीब 411 दिनों में लगभग 2400 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। यात्रा के दौरान वह मुजफ्फरनगर के संभलहेड़ा स्थित शिवधाम, मध्य प्रदेश के महाकालेश्वर मंदिर और नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे।
भोलेनाथ के प्रति समर्पण है यात्रा का उद्देश्य
हरपाल नाथ का कहना है कि यह यात्रा किसी व्यक्तिगत मनोकामना को पूरा करने के लिए नहीं है, बल्कि भगवान भोलेनाथ के प्रति उनकी श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। उनका विश्वास है कि जब तक शरीर में प्राण और भोलेनाथ की कृपा रहेगी, तब तक वह इसी तरह कठिन कांवड़ यात्राएं करते रहेंगे।
रास्ते में श्रद्धालु कर रहे सहयोग
उन्होंने बताया कि पूरी यात्रा के दौरान शिवभक्त उन्हें भोजन, पानी और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। हरपाल नाथ के अनुसार, कांवड़ यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि शिवभक्त एक-दूसरे की सेवा को भगवान शिव की सेवा मानते हैं।
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