मुजफ्फरनगर: अनशन पर बैठीं सपा नेत्री से मिलने पहुंचे सांसद हरेंद्र मलिक, प्रशासन पर साधा निशाना

HIGHLIGHTS
- सपा नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
- युधिष्ठिर पहलवान ने विवाद से जुड़े दूसरे पक्ष पर भी कार्रवाई की मांग रखी।
- डॉ. मोनिका सिंह की तबीयत को लेकर सपा नेताओं ने प्रशासन पर सवाल उठाए।
मुजफ्फरनगर। महावीर चौक पर समाजवादी पार्टी के धरने के दौरान हुए विवाद के बाद दर्ज मुकदमों को लेकर सियासी विवाद बढ़ता जा रहा है। अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठीं सपा नेत्री डॉ. मोनिका सिंह रविवार को तीसरे दिन भी धरना स्थल पर डटी रहीं। देर रात करीब 10:30 बजे समाजवादी पार्टी के सांसद हरेंद्र मलिक पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ कलेक्ट्रेट स्थित धरना स्थल पहुंचे और उनका हालचाल जाना।
इस दौरान सांसद हरेंद्र मलिक ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर प्रशासन चाहता तो इस मामले का समाधान पहले ही दिन हो सकता था, लेकिन लापरवाही के चलते यह मुद्दा अब बड़ा बन गया है। उन्होंने कहा कि डॉ. मोनिका सिंह तीन दिनों से भूख हड़ताल पर हैं, लेकिन अभी तक कोई मेडिकल टीम उनकी जांच के लिए नहीं पहुंची।
सांसद ने दावा किया कि डॉ. मोनिका सिंह का ब्लड प्रेशर भी कम हो गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक दिन पहले सिविल लाइन थाने के दो पुलिसकर्मी धरना स्थल पर पहुंचे थे और उन्हें धमकाकर गए।
सपा जिलाध्यक्ष जिया चौधरी ने भी पुलिस प्रशासन पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस की कथित एकतरफा कार्रवाई के विरोध में ही डॉ. मोनिका सिंह ने भूख हड़ताल शुरू की है। उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी धरना स्थल पर पहुंचे हैं।
सपा नेता युधिष्ठिर पहलवान ने बताया कि शनिवार को पुलिस अधिकारियों के साथ बातचीत हुई थी। उनके मुताबिक, थाना सिविल लाइन प्रभारी ने कहा था कि उच्च अधिकारियों के निर्देश मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। युधिष्ठिर पहलवान का कहना है कि जिस व्यक्ति के कारण विवाद शुरू हुआ, उसके खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर एक पक्ष पर कार्रवाई की जा सकती है तो दूसरे पक्ष के खिलाफ भी निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि डॉ. मोनिका सिंह की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्होंने एलआईयू के एक अधिकारी से डॉक्टर उपलब्ध कराने की मांग की थी। हालांकि, उन्हें बताया गया कि ज्यादातर चिकित्सक कांवड़ ड्यूटी में लगे हुए हैं और उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया जाए।
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