मुजफ्फरनगर: नशीली दवाओं के केस में 15.40 लाख रुपये रिलीज करने की अर्जी खारिज

HIGHLIGHTS
- अदालत ने 15.40 लाख रुपये की नकदी रिलीज करने की अर्जी खारिज की।
- पुलिस ने 2 फरवरी 2024 को नशीले कैप्सूल, इंजेक्शन, दो कारें और 23.69 लाख रुपये बरामद किए थे।
- शाजेब सिद्दीकी ने रकम को फल के थोक कारोबार की कमाई बताया था।
मुजफ्फरनगर। नशीली दवाओं की बरामदगी से जुड़े करीब ढाई साल पुराने मामले में अदालत ने 15.40 लाख रुपये की नकदी रिलीज करने की मांग खारिज कर दी है। विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने यह फैसला सुनाया। यह रकम नगर कोतवाली पुलिस ने नशीले कैप्सूल और इंजेक्शन की बरामदगी के दौरान जब्त की गई कुल 23 लाख 69 हजार 800 रुपये की नकदी में शामिल थी।
अंबा विहार निवासी शाजेब सिद्दीकी ने 15.40 लाख रुपये को फल के कारोबार से हुई कमाई बताया था। अदालत ने मामले में यह सवाल भी उठाया कि नशीले पदार्थों और बड़ी रकम की बरामदगी के बावजूद एनडीपीएस एक्ट के तहत संपत्ति जब्ती की कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
अदालत ने अपने आदेश में तत्कालीन एसएसपी अभिषेक सिंह समेत छह पुलिस अधिकारियों की भूमिका का उल्लेख किया। साथ ही, आदेश की प्रति उच्च पुलिस अधिकारियों, शासन और केंद्र सरकार को आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए भेजने के निर्देश दिए।
दो कारों के साथ नशीले कैप्सूल और इंजेक्शन बरामद
मामले के अनुसार, नगर कोतवाली पुलिस ने 2 फरवरी 2024 को शाजेब सिद्दीकी और उसके साथियों को नशीली दवाओं की बरामदगी के मामले में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने दो कारों के अलावा 1,920 स्पास्मो प्रो मैक्स प्लस कैप्सूल, पेंटाजोसिन लैक्टेट के 400 इंजेक्शन और अन्य इंजेक्शन बरामद किए थे।
इस दौरान कुल 23,69,800 रुपये की नकदी भी मिली थी। अदालत के आदेश में बरामद प्रतिबंधित पदार्थों की मात्रा को व्यावसायिक मात्रा की श्रेणी में बताया गया है। पुलिस का आरोप था कि बरामद दवाओं और नकदी का संबंध नशीली दवाओं के अवैध कारोबार से था।
पहले सहआरोपित की 5.50 लाख रुपये की रकम हुई थी रिलीज
मामले में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद बरामद नकदी को रिलीज कराने की मांग अदालत में पहुंची। इस दौरान सहआरोपित अनुज की ओर से मांगी गई 5.50 लाख रुपये की रकम 20 जनवरी 2025 को रिलीज कर दी गई थी। इसके बाद शाजेब सिद्दीकी ने अपनी बताई गई 15.40 लाख रुपये की नकदी वापस दिलाने के लिए अर्जी दाखिल की।
शाजेब की ओर से अदालत में दलील दी गई कि यह रकम उसके फल के थोक कारोबार से संबंधित थी। उसका कहना था कि वह फल कारोबार में आपूर्ति और रकम एकत्र करने का काम करता था और बरामद नकदी उसी व्यवसाय से जुड़ी हुई थी।
अपने दावे के समर्थन में उसने कारोबार से जुड़े दस्तावेजों की छायाप्रतियां और संग्रह एजेंट के रूप में नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज पेश किए। शाजेब इससे पहले भी नकदी रिलीज कराने के लिए अदालत में अर्जी दे चुका था। पूर्व अर्जियां खारिज होने के बाद उसने हाईकोर्ट का रुख किया था।
हाईकोर्ट ने दोबारा अर्जी दाखिल करने का दिया था अवसर
हाईकोर्ट ने 14 सितंबर 2026 को पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए शाजेब को सहायक दस्तावेजों के साथ दोबारा अर्जी दाखिल करने का अवसर दिया था। इसके बाद उसने विचारण न्यायालय में फिर से नकदी रिलीज करने की मांग की।
हालांकि, हाईकोर्ट से दोबारा अर्जी दाखिल करने की अनुमति मिलने का मतलब यह नहीं था कि रकम रिलीज होना तय हो गया था। विचारण न्यायालय को उपलब्ध दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर फैसला करना था।
अभियोजन पक्ष ने शाजेब की अर्जी का विरोध किया। उसका तर्क था कि बरामद नकदी नशीली दवाओं की बिक्री से प्राप्त हुई थी और उसे फल कारोबार की कमाई बताने के लिए पेश किए गए दस्तावेज पर्याप्त नहीं थे।
कारोबार के दस्तावेजों पर भी अदालत ने उठाए सवाल
अदालत के आदेश के अनुसार, शाजेब की ओर से पेश किए गए कारोबार संबंधी दस्तावेजों पर जीएसटी या लाइसेंस नंबर जैसी आवश्यक कारोबारी पहचान नहीं थी। ये दस्तावेज प्रथम दृष्टया रकम रिलीज कराने के उद्देश्य से तैयार किए गए प्रतीत हुए।
अदालत के सामने पुलिसकर्मियों के बयानों का भी उल्लेख किया गया। इन बयानों में कथित तौर पर शाजेब के हवाले से कहा गया था कि रकम नशीली दवाओं की बिक्री से प्राप्त हुई थी और उससे आगे दवाएं खरीदने की योजना थी। यह अभियोजन पक्ष के दावे और केस रिकॉर्ड में दर्ज कथनों का हिस्सा है, इसे अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने शाजेब की 15.40 लाख रुपये की नकदी रिलीज कराने की अर्जी खारिज कर दी। फिलहाल इस रकम को रिलीज करने की अनुमति नहीं दी गई है।
अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की पहचान पर अदालत की चिंता
अदालत के आदेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा एनडीपीएस एक्ट के अध्याय-5ए से जुड़ा है। अदालत ने टिप्पणी की कि इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों और नकदी की बरामदगी के बावजूद कथित अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की पहचान, जब्ती और समपहरण के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाए जाने का रिकॉर्ड सामने नहीं आया।
अदालत की चिंता थी कि यदि कानून में तय संपत्ति संबंधी प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता, तो नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े मामलों में बरामद रकम को रिलीज कराने का रास्ता खुल सकता है। आदेश में इस पहलू पर गंभीर असंतोष जताया गया है।
कानूनी रूप से नकदी बरामद होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि पूरी रकम अवैध कारोबार से अर्जित की गई है। इसी तरह, किसी व्यक्ति का रकम को वैध कारोबारी कमाई बताना भी अपने आप में पर्याप्त नहीं होता। ऐसे मामलों में दावे के समर्थन में दस्तावेज, बरामदगी की परिस्थितियां, केस डायरी और अन्य साक्ष्य महत्वपूर्ण होते हैं।
निर्धारित प्रक्रिया के तहत जब्ती और समपहरण का प्रावधान
इस मामले में अदालत ने शाजेब की ओर से पेश दस्तावेजों को पर्याप्त नहीं माना और उसकी अर्जी खारिज कर दी। एनडीपीएस एक्ट के अध्याय-5ए में अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की पहचान, उसे जब्त या फ्रीज करने और निर्धारित प्रक्रिया के बाद समपहरण से संबंधित प्रावधान हैं।
इस अध्याय की धारा 68-ई संपत्ति की पहचान, जबकि धारा 68-एफ जब्ती या फ्रीज करने की प्रक्रिया से संबंधित है। ये प्रावधान कानून में निर्धारित पात्र व्यक्तियों और परिस्थितियों में लागू होते हैं। संपत्ति को जब्त या समपहरण करने के लिए वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से अर्जित संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई करना और ऐसे कारोबार से मिलने वाले आर्थिक लाभ को रोकना है। अदालत की टिप्पणी का मुख्य विषय यह था कि मामले में बरामद नकदी और संभावित अवैध संपत्ति को लेकर कानून के तहत जरूरी कार्रवाई की गई या नहीं।
छह पुलिस अधिकारियों की भूमिका का उल्लेख
अदालत ने अपने आदेश में छह पुलिस अधिकारियों की भूमिका और कार्रवाई का उल्लेख किया है। इनमें तत्कालीन एसएसपी और वर्तमान में डीआईजी सहारनपुर अभिषेक सिंह, तत्कालीन एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापति, तत्कालीन सीओ सिटी व्योम बिंदल, तत्कालीन कोतवाली नगर प्रभारी महावीर सिंह चौहान, विवेचक संजय गिरी और बरामदगी करने वाले उपनिरीक्षक विनोद कुमार शामिल हैं।
अदालत ने आदेश की प्रति अपर पुलिस महानिदेशक, मेरठ जोन, पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग, उत्तर प्रदेश शासन और केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को आवश्यक विधिक कार्रवाई के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं।
इस तरह अदालत ने शाजेब सिद्दीकी की 15.40 लाख रुपये की नकदी रिलीज कराने की अर्जी खारिज करने के साथ ही छह पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर टिप्पणी की और उच्च अधिकारियों, शासन तथा केंद्र सरकार को आदेश की प्रति भेजने के निर्देश दिए।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.