मुजफ्फरनगर में महाराजा अग्रसेन प्रतिमा पर ‘श्रेय की जंग’, विवाद ने पकड़ा तूल

HIGHLIGHTS
- मुजफ्फरनगर में निर्माणाधीन महाराजा अग्रसेन प्रतिमा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब तेज होते हुए ‘श्रेय की राजनीति’ में बदलता दिखाई दे रहा है।
- संयुक्त वैश्य अग्रवाल महासभा द्वारा उठाए गए सवालों के बाद मामला और गरमा गया है।
- इसी बीच भाजपा नेता और पूर्व सभासद नवनीत कुछल खुद निर्माण स्थल पर पहुंचे और मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा।
- नवनीत कुछल ने महासभा की ओर से लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि प्रतिमा स्थापना की प्रक्रिया उनके प्रयासों से ही आगे बढ़ी है।
- उन्होंने इस दौरान वर्ष 2021 और 2…
मुजफ्फरनगर में निर्माणाधीन महाराजा अग्रसेन प्रतिमा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब तेज होते हुए ‘श्रेय की राजनीति’ में बदलता दिखाई दे रहा है। संयुक्त वैश्य अग्रवाल महासभा द्वारा उठाए गए सवालों के बाद मामला और गरमा गया है। इसी बीच भाजपा नेता और पूर्व सभासद नवनीत कुछल खुद निर्माण स्थल पर पहुंचे और मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा।
नवनीत कुछल ने महासभा की ओर से लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि प्रतिमा स्थापना की प्रक्रिया उनके प्रयासों से ही आगे बढ़ी है। उन्होंने इस दौरान वर्ष 2021 और 2022 में दिए गए प्रस्तावों से जुड़े दस्तावेज भी मीडिया को दिखाए। साथ ही उन्होंने 2025 में बोर्ड बैठक में पारित प्रस्ताव का भी उल्लेख किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे ही प्रतिमा का कार्य अंतिम चरण में पहुंचा, वैसे ही कुछ लोग सामने आकर इसका श्रेय लेने की कोशिश करने लगे हैं। उनके अनुसार यह पूरा विवाद केवल नाम दर्ज कराने की कोशिश का परिणाम है, जबकि असल काम जमीन पर उनके प्रयासों से आगे बढ़ा है।
इस मौके पर उनके साथ वैश्य समाज के कई लोग भी मौजूद रहे, जिनमें नितिन सागर, विपिन गुप्ता, दीपक मित्तल, कृष्ण गोपाल मित्तल और सलभ गुप्ता शामिल रहे। सभी ने नवनीत कुछल के दावों का समर्थन किया और कहा कि प्रक्रिया में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

वहीं इससे पहले संयुक्त वैश्य अग्रवाल महासभा ने निर्माण स्थल पर लगाए गए पोस्टरों को लेकर आपत्ति जताई थी। महासभा का कहना था कि महाराजा अग्रसेन प्रतिमा किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे समाज के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उनका यह भी दावा है कि इस परियोजना का पूरा खर्च समाज की 19 संस्थाओं द्वारा वहन किया जा रहा है।
दोनों पक्षों के आमने-सामने आने के बाद यह विवाद और गहराता जा रहा है। मामले को लेकर वैश्य समाज के भीतर भी चर्चा तेज हो गई है और स्थिति लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.