लोक अदालत में बड़ी राहत, मुजफ्फरनगर में हजारों मामलों का हुआ निपटारा

मुजफ्फरनगर जिला न्यायालय में द्वितीय शनिवार के अवसर पर राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में मामलों का मौके पर ही निस्तारण कर वादकारियों को राहत प्रदान की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष बिरेन्द्र कुमार सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
अपने संबोधन में जनपद न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत का सबसे बड़ा उद्देश्य आपसी सहमति के आधार पर विवादों का समाधान करना है, जिससे न तो किसी पक्ष की हार होती है और न ही जीत, बल्कि आपसी सौहार्द और समय की बचत होती है। उन्होंने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऋण से जुड़े मामलों में अधिकतम संभव छूट देकर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय खलीकुज्जमा ने पारिवारिक विवादों को संवाद और समझौते के माध्यम से सुलझाने पर विशेष जोर दिया। लोक अदालत में परिवार न्यायालयों के माध्यम से कुल 64 मामलों का आपसी सहमति से निस्तारण किया गया।
नोडल अधिकारी एवं अपर जिला जज रवि कुमार दिवाकर ने कहा कि लोक अदालत आज तेज और सरल न्याय दिलाने का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है, जो विशेष रूप से कमजोर वर्ग के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. सत्येन्द्र कुमार चौधरी के अनुसार, इस लोक अदालत में कुल 4,32,584 मामलों का निस्तारण किया गया। वहीं मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की पीठासीन अधिकारी आदेश नैन ने 56 मामलों का निस्तारण करते हुए 6.11 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा दिलाया।
विभिन्न न्यायालयों में 6,190 आपराधिक शमनीय मामलों का निस्तारण किया गया और 7.27 लाख रुपये का अर्थदंड वसूला गया। इसके अलावा 33 दीवानी मामलों का भी समाधान किया गया। एनआई एक्ट से जुड़े 31 मामलों में लगभग 2.97 करोड़ रुपये का निस्तारण हुआ।
जिलाधिकारी उमेश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में राजस्व विभाग ने भी सक्रिय भूमिका निभाते हुए 15,876 मामलों का निस्तारण कर 4.54 करोड़ रुपये का राजस्व वसूला।
इसके साथ ही विभिन्न बैंकों द्वारा 384 ऋण मामलों का समाधान करते हुए लगभग 5.62 करोड़ रुपये की राशि का निपटारा किया गया।
इस अवसर पर जिला बार संघ, सिविल बार संघ के पदाधिकारी, न्यायिक अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में वादकारी उपस्थित रहे।
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