मुजफ्फरनगर: राजकुमार भाटी के बयान पर बवाल, जूता मारने पर इनाम घोषित

HIGHLIGHTS
- मुजफ्फरनगर में समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता राजकुमार भाटी के कथित बयानों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया है।
- संयुक्त हिंदू मोर्चा ने उन पर हिंदू समाज की विभिन्न जातियों और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया है।
- संयुक्त हिंदू मोर्चा के अध्यक्ष मनोज सैनी ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए ऐलान किया है कि जो भी व्यक्ति राजकुमार भाटी को जूता मारेगा, उसे प्रति जूता 1100 रुपये का इनाम दिया जाएगा।
- इस घोषणा के बाद मामला और अधिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है।
- शिवसेना के प्…
मुजफ्फरनगर में समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता राजकुमार भाटी के कथित बयानों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया है। संयुक्त हिंदू मोर्चा ने उन पर हिंदू समाज की विभिन्न जातियों और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया है।
संयुक्त हिंदू मोर्चा के अध्यक्ष मनोज सैनी ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए ऐलान किया है कि जो भी व्यक्ति राजकुमार भाटी को जूता मारेगा, उसे प्रति जूता 1100 रुपये का इनाम दिया जाएगा। इस घोषणा के बाद मामला और अधिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है। शिवसेना के प्रदेश महासचिव डॉ. योगेंद्र शर्मा ने भी इस बयान का समर्थन किया है।
मोर्चा नेताओं का कहना है कि राजकुमार भाटी लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जिनसे समाज के विभिन्न वर्गों की भावनाएं आहत हो रही हैं। उनके अनुसार, इससे पहले भी ब्राह्मण समाज की महिलाओं पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी और अब जाट व गुर्जर समाज की महिलाओं को लेकर भी विवादित बयान सामने आए हैं।

संयुक्त हिंदू मोर्चा ने इसे केवल किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि पूरे समाज के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया है। संगठन का कहना है कि ऐसे बयानों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मनोज सैनी ने किसान नेता राकेश टिकैत का नाम लेते हुए सवाल उठाया कि जिस मंच से यह बयान दिए गए, वहां मौजूद लोगों ने तत्काल विरोध क्यों नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंच पर मौजूद वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी भी ऐसे बयानों को बढ़ावा देती है।
सैनी ने चेतावनी दी है कि यदि राजकुमार भाटी मुजफ्फरनगर आते हैं तो उनका कड़ा विरोध किया जाएगा और “मुंह काला” करने जैसी बात भी कही गई है। वहीं शिवसेना नेता डॉ. योगेंद्र शर्मा ने कहा कि राजनीतिक दलों को समाज में तनाव पैदा करने वाले बयानों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और ऐसी स्थिति को बढ़ने से रोकना चाहिए।
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