टिकट की मांग पर भड़के नसीमुद्दीन, सपा कार्यक्रम बीच में छोड़कर चले गए

समाजवादी पार्टी में सबकुछ सामान्य होने के दावों के बीच रविवार को एक कार्यक्रम में पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए। रामगंगा विहार स्थित एक बैंक्वेट हॉल में आयोजित प्रेस वार्ता के बाद माहौल उस समय अचानक बदल गया, जब भोजन के दौरान टिकट को लेकर उठी एक मांग ने वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी को नाराज कर दिया और वे कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर चले गए।
दरअसल, मुरादाबाद में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सपा नेता सलीम अख्तर को टिकट दिलाने की बात समर्थकों द्वारा उनके सामने रखी गई। यह सुनते ही नसीमुद्दीन सिद्दीकी भड़क गए। उन्होंने साफ कहा कि टिकट तय कराने का अधिकार उनका नहीं है और वे अभी पार्टी में नए हैं। नाराज होकर वे मेज से उठे और बाहर निकल गए। मौजूद नेताओं और पदाधिकारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी।
इससे पहले प्रेस वार्ता में सिद्दीकी ने दावा किया था कि पार्टी में किसी तरह का मनभेद नहीं है, केवल विचारों का अंतर हो सकता है और सभी का लक्ष्य 2027 में सपा की बड़ी जीत सुनिश्चित करना है। लेकिन कुछ ही देर बाद हुए घटनाक्रम ने पार्टी की अंदरूनी खींचतान को उजागर कर दिया।
सूत्रों के अनुसार, इस कार्यक्रम के दौरान पार्टी के कई बड़े चेहरे अनुपस्थित रहे। केवल कुछ विधायक और पदाधिकारी ही मौजूद थे। वहीं अनुपस्थिति पर सफाई देते हुए कहा गया कि कुछ नेताओं के पारिवारिक कारणों से वे शामिल नहीं हो सके।
प्रेस वार्ता में नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने 2027 चुनाव को लेकर सपा की योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पार्टी सत्ता में आने पर महिलाओं को आर्थिक सहायता देने और घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का वादा करती है। साथ ही उन्होंने प्रदेश सरकार पर महंगाई, बेरोजगारी और कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ राज्यों में प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग के आरोप लगते रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी उन्होंने टिप्पणी की।
मुरादाबाद को सपा का मजबूत गढ़ बताते हुए उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले चुनाव में पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी। आजम खां को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने उन्हें बड़ा नेता बताया, जबकि कुछ अन्य राजनीतिक चेहरों पर टिप्पणी करने से परहेज किया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सपा के भीतर एक बार फिर अंदरूनी असहमति और संगठनात्मक खींचतान को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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