PM मोदी के पैर छूने झुकी NCC कैडेट, गिरी टोपी तो प्रधानमंत्री ने खुद उठाकर पहनाई

HIGHLIGHTS
- लाल किले पर एनसीसी कैडेट्स और माई भारत स्वयंसेवकों से मिले पीएम मोदी।
- अभिवादन के दौरान कैडेट की टोपी गिरने पर पीएम मोदी ने तुरंत उठाई।
- पीएम मोदी ने टोपी कैडेट के सिर पर वापस रखकर बातचीत जारी रखी।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले पर एनसीसी कैडेट्स और माई भारत स्वयंसेवकों से मुलाकात की। इस दौरान एक भावुक पल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। एक एनसीसी कैडेट प्रधानमंत्री का अभिवादन करने के लिए झुकी और उनके पैर छूने लगी, तभी उसकी टोपी गिर गई। प्रधानमंत्री मोदी ने तुरंत टोपी उठाई और उसे धीरे से कैडेट के सिर पर वापस रख दिया। इसके बाद उन्होंने बातचीत जारी रखी।
यह घटना स्वतंत्रता दिवस समारोह के समापन पर हुई। प्रधानमंत्री सुरक्षा घेरे से बाहर निकलकर लाल किले पर मौजूद युवाओं के बीच पहुंचे थे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा और यूजर्स ने प्रधानमंत्री के इस व्यवहार की सराहना की। एक यूजर ने इसे बेहतरीन वीडियो बताया, जबकि दूसरे ने कहा कि सच्ची नेतृत्व क्षमता छोटी-छोटी घटनाओं में दिखाई देती है।
प्रधानमंत्री ने दिया 75 मिनट का भाषण
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर 75 मिनट का भाषण दिया। अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाने में युवा पीढ़ी की अहम भूमिका होगी।
प्रधानमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग, अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रशिक्षण देने वाले स्किलिंग कार्यक्रम और 5 से 15 वर्ष के बच्चों के लिए देशव्यापी खेल प्रतिभा खोज अभियान की घोषणा की।
उन्होंने नागरिक सुरक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने की योजना का भी जिक्र किया। साथ ही युवाओं से निर्माण, तकनीक, नवाचार, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया।
एनसीसी कैडेट्स और माई भारत स्वयंसेवकों ने प्रस्तुत किया राष्ट्रगान
80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ भी मनाई गई। पहली बार लाल किले के समारोह में सेना के बैंड ने राष्ट्रगीत की धुन बजाई और मेहमानों ने साथ में इसका गायन किया।
कार्यक्रम के अंत में एनसीसी कैडेट्स और माई भारत स्वयंसेवकों ने ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान प्रस्तुत किया। ज्ञानपथ पर बैठे कैडेट्स और स्वयंसेवकों ने ‘वंदे मातरम’ शब्द का आकार भी बनाया।
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