मुजफ्फरनगर: शिव चौक मंदिर पर लाल पर्दा हटाने पर बवाल, देर रात तक कोतवाली में हंगामा

HIGHLIGHTS
- शिव चौक मंदिर पर लगाए गए लाल पर्दे को हटाने के मामले में बुधवार देर रात नगर कोतवाली में माहौल गरमा गया।
- पुलिस द्वारा कुछ हिंदूवादी नेताओं को हिरासत में लिए जाने की सूचना फैलते ही भाजपा और विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में कोतवाली पहुंच गए और पुलिस कार्रवाई का विरोध करने लगे।
- कोतवाली में पहुंचे नेताओं ने हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की।
- इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच लंबी बहस भी हुई।
- कार्यकर्ताओं का आरोप था कि उन्हें कई घंटों तक किस…
मुजफ्फरनगर। शिव चौक मंदिर पर लगाए गए लाल पर्दे को हटाने के मामले में बुधवार देर रात नगर कोतवाली में माहौल गरमा गया। पुलिस द्वारा कुछ हिंदूवादी नेताओं को हिरासत में लिए जाने की सूचना फैलते ही भाजपा और विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में कोतवाली पहुंच गए और पुलिस कार्रवाई का विरोध करने लगे।
कोतवाली में पहुंचे नेताओं ने हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच लंबी बहस भी हुई। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि उन्हें कई घंटों तक किसी वरिष्ठ अधिकारी से मिलने नहीं दिया गया, जिससे नाराजगी और बढ़ गई।

मंदिर पर पर्दा लगाने से शुरू हुआ विवाद
मामले की शुरुआत मोहर्रम जुलूस के दौरान शिव चौक स्थित मंदिर के एक हिस्से को लाल कपड़े से ढके जाने से हुई। इस व्यवस्था की जानकारी मिलने पर कुछ हिंदूवादी नेता मौके पर पहुंचे और मंदिर पर लगाए गए लाल कपड़े को हटाकर पुलिस चौकी में रख दिया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में ले लिया।
संगठनों का विरोध तेज
हिरासत की खबर फैलते ही भाजपा और संयुक्त हिंदू मोर्चा सहित कई संगठनों के पदाधिकारी कोतवाली पहुंच गए। नेताओं ने आरोप लगाया कि मंदिर को ढकना धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है और इसका विरोध करना किसी भी तरह से अपराध नहीं माना जा सकता।
भाजपा नेता सचिन सिंघल ने कहा कि वह लंबे समय से मुजफ्फरनगर में रह रहे हैं और पहले कभी ऐसी व्यवस्था नहीं देखी गई। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा सरकार में मंदिरों को ढकने की जरूरत क्यों पड़ रही है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में इस तरह की व्यवस्था दोबारा लागू की गई तो हिंदू संगठन और भाजपा कार्यकर्ता बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
पुलिस का पक्ष
पुलिस प्रशासन का कहना है कि मोहर्रम जुलूस के दौरान कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए यह कदम एहतियातन उठाया गया था। फिलहाल पूरे मामले के बाद शहर में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और प्रशासन हालात पर नजर रखे हुए है।
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