कट्टर ईमानदार !

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज जितेन्द्र सिंह ने अपने 598 पृष्ठों के फैसले में आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा उनके डिप्टी मनीष सिसोदिया सहित कथित आबकारी घोटाले के सभी 23 लोगों को दोषमुक्त कर दिया है। जज साहब ने सीधे-सीधे शब्दों में लिख दिया कि शराब नीति बदलने में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ, कथित भ्रष्टाचार के कोई बैंकिंग साक्ष्य नहीं मिले, केवल गवाह के कहने मात्र से किसी को भ्रष्ट नहीं माना जा सकता। सी.बी.आई के जांचकर्ता ने झूठे आरोप गढ़े, जिसके आधार पर मुकदमा कोर्ट में दायर करने लायक ही न था। जज साहब ने लिखा है कि सी.बी.आई को ऐसे विवेचक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करनी चाहिए।
फैसला सुनते ही अरविंद केजरीवाल दहाड़ मार के रोने लगे। पास खड़े मनीष सिसोदिया ने ढांढस बंधाया तो बोले- 'देखा अदालत ने भी मुझे कट्टर ईमानदार मान लिया है।' लेकिन जज साहब की तरह उन्होंने सी.बी.आई के विवेचक को दोष नहीं दिया। सीधे नरेंद्र मोदी और अमित शाह को साजिशकर्ता बता दिया। संकेत दिया कि भाजपा के इन शीर्षस्थ नेताओं से राहुल गांधी नहीं निपटेंगे, मैं ही निपटूंगा।
सी.बी.आई राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले के विरुद्ध दिल्ली हाई कोर्ट चली गई है। वहां कब फैसला आयेगा, और क्या आएगा, कौन जाने ! तब तक तो अरविंद केजरीवाल छाती ठोक कर खुद को कट्टर ईमानदार' कह सकते हैं। फैसला आते ही तेजस्वी यादव, अखिलेश यादव, महुआ मोइत्रा, महबूबा मुफ्ती, संजय राउत दहाड़ने लगे हैं कि सी.बी.आई, ई.डी. आदि एजेंसियां भाजपा के इशारे पर काम करती हैं।
आबकारी मुकदमे के फैसले से राजनीति में हलचल तो मची ही है और यह भी प्रमाणित होता है कि लोकतंत्र के तीनों अंगों में न्यायपालिका ही बलशाली है। उदयपुर के दर्जी कन्हैयालाल के गले पर छुरी चलाने के बर्बर कुकृत्य को हत्यारों ने वीडियो पर वायरल किया, जज साहब ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया। किसे छोड़ें किसे सजा दें, किसे जमानत दें और किस पर स्वेच्छा से हंटर चला दें, माफी मांगने के बाद भी न पसीजें, यह सब न्यायपालिका पर निर्भर है। उदाहरणों की भरमार है, कहां तक गिनाएं। बहरहाल केजरीवाल को कट्टर ईमानदारी का प्रमाणपत्र तो मिल ही गया है। लेकिन इससे भाजपा से कहीं ज्यादा कांग्रेस क्यों परेशान है? क्या इस लिए कि केजरीवाल की शिकायत कांग्रेस के अजय माकन ने की थी, इसलिए कांग्रेस बौखलाई हुई है।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'
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