यूपी में बिजली कटौती पर ताबड़तोड़ एक्शन, दो बड़े अधिकारी सस्पेंड

उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच हो रही अनियमित बिजली आपूर्ति और अघोषित कटौती को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सख्त रुख में नजर आ रहे हैं। बिजली संकट और इससे आम जनता को हो रही परेशानी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक से पहले ही विभागीय स्तर पर बड़ी कार्रवाई कर दी है।
अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) ने ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के निर्देश पर यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के दो अधिशासी अभियंताओं को निलंबित कर दिया है, जबकि एक अन्य अधिकारी को मुख्यालय से अटैच किया गया है। गाजियाबाद के अधिशासी अभियंता (पारेषण) राहुल और मेरठ के अधिशासी अभियंता योगेश कुमार को सस्पेंड किया गया है। वहीं, पश्चिम क्षेत्र के एक अन्य अधिशासी अभियंता राहुल को मेरठ मुख्यालय से अटैच किया गया है।
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री की प्रस्तावित समीक्षा बैठक से ठीक पहले ऊर्जा विभाग में लापरवाही के खिलाफ एक सख्त कदम के रूप में देखी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में मेरठ क्षेत्र में 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों में लगातार तकनीकी खराबियां सामने आई थीं। 19 मई को मोदीनगर-2–कंकरखेड़ा लाइन में कंडक्टर टूटने से ट्रिपिंग हुई थी। इसके अगले ही दिन मोदीनगर-2–बेदवापुर लाइन में भी तकनीकी खराबी आई, जिससे टावर क्षतिग्रस्त हो गया। इसके अलावा शताब्दीनगर-प्रतापपुर फीडर में आइसोलेटर फ्लैशओवर की घटना से कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित रही।
इन घटनाओं के चलते 33 केवी और 11 केवी फीडरों तक बिजली सप्लाई बाधित हुई, जिससे कई क्षेत्रों में लोगों को लंबे समय तक परेशानी का सामना करना पड़ा।
इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार सुबह 10:30 बजे ऊर्जा विभाग की आपात उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। बैठक में सभी प्रमुख ऊर्जा अधिकारियों और डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों को तलब किया गया है।
बैठक का मुख्य फोकस प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना, तकनीकी खामियों को तुरंत दूर करना और अघोषित ट्रिपिंग पर रोक लगाना होगा। मुख्यमंत्री लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के भी सख्त निर्देश दे सकते हैं, जिससे विभागीय स्तर पर और बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
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