ईरान पर सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में खारिज

अमेरिका में ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई को रोकने वाले प्रस्ताव को बेहद मामूली अंतर से खारिज कर दिया। गुरुवार को हुई वोटिंग में प्रस्ताव के समर्थन में 212 सांसदों ने मतदान किया, जबकि 219 सदस्यों ने इसके विरोध में वोट डाले।
यदि यह प्रस्ताव पारित हो जाता तो ट्रंप प्रशासन को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तब तक रोकनी पड़ती, जब तक कि कांग्रेस इसकी औपचारिक मंजूरी नहीं दे देती। इससे पहले भी सीनेट में इसी तरह का प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसे 47 के मुकाबले 53 मतों से अस्वीकार कर दिया गया था। लगातार दूसरे दिन ऐसे प्रस्ताव का गिरना इस मुद्दे पर अमेरिकी संसद में गहरे मतभेद को दर्शाता है।
कांग्रेस में अधिकारों को लेकर बहस तेज
इस मतदान के बाद साफ हो गया है कि ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर अमेरिकी सांसदों के बीच राय बंटी हुई है। कई सांसदों का कहना है कि संविधान के अनुसार युद्ध की घोषणा करने का अधिकार केवल कांग्रेस को है, न कि राष्ट्रपति को।
हाउस की विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने कहा कि अमेरिका में राष्ट्रपति को राजा जैसी शक्तियां नहीं दी गई हैं। उनके अनुसार यदि प्रशासन को लगता है कि ईरान के खिलाफ युद्ध जरूरी है, तो उसे पहले कांग्रेस के सामने इसकी आवश्यकता और कारण स्पष्ट करने चाहिए।
रिपब्लिकन सांसदों ने किया समर्थन
सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी के अधिकांश सांसद राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले के साथ खड़े नजर आए। उनका कहना है कि ईरान लंबे समय से पश्चिमी देशों के लिए सुरक्षा चुनौती बना हुआ था और सैन्य कार्रवाई उसी खतरे का जवाब है।
रिपब्लिकन सांसद ब्रायन मस्ट के मुताबिक राष्ट्रपति अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत देश को संभावित खतरे से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना था कि युद्ध रोकने का प्रस्ताव मूल रूप से राष्ट्रपति से निष्क्रिय रहने की मांग जैसा था।
डेमोक्रेट्स का आरोप—चुनाव से जुड़ा फैसला
दूसरी ओर डेमोक्रेट नेताओं ने इस सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उनका आरोप है कि यह कदम राजनीतिक और चुनावी लाभ के उद्देश्य से उठाया गया है और इसे कांग्रेस की अनुमति के बिना शुरू किया गया।
डेमोक्रेट सांसद जेमी रास्किन ने कहा कि अमेरिकी संविधान स्पष्ट रूप से बताता है कि युद्ध का निर्णय लेने का अधिकार कांग्रेस के पास है। उनके अनुसार इतने बड़े सैन्य कदम से पहले व्यापक चर्चा और पारदर्शिता जरूरी थी।
युद्ध के चलते बढ़ी चिंताएं
ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष ने अमेरिका में चिंता भी बढ़ा दी है। कुवैत में ईरानी ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। वहीं मध्य पूर्व में रह रहे हजारों अमेरिकी नागरिक सुरक्षित स्थानों पर जाने की कोशिश कर रहे हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने भी स्वीकार किया है कि इस संघर्ष में आगे और अमेरिकी सैनिकों की जान जा सकती है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अनुसार यह अभियान करीब आठ सप्ताह तक चल सकता है, जो पहले अनुमानित अवधि से लगभग दोगुना है।
फिलहाल अमेरिका और इस्राइल मुख्य रूप से हवाई हमलों के जरिए ईरान के सैन्य ठिकानों और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को निशाना बना रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस संघर्ष में अब तक ईरान में 1200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
लंबे युद्ध की आशंका
कई अमेरिकी सांसदों को आशंका है कि यह टकराव कहीं अफगानिस्तान और इराक की तरह लंबे और महंगे युद्ध में न बदल जाए। कुछ सांसदों ने सुझाव दिया है कि राष्ट्रपति को सीमित समय तक सैन्य कार्रवाई की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन उसके बाद कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य होनी चाहिए। हालांकि इस प्रस्ताव पर अभी कोई मतदान नहीं हुआ है।
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