वाराणसी कफ सीरप तस्करी केस: 39 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल, मुख्य आरोपी फिर भगोड़ा घोषित

वाराणसी। वर्ष 2025 में 15 नवंबर को दर्ज कफ सीरप तस्करी के मामले में पुलिस ने 142 दिनों की जांच के बाद 39,000 पन्नों का आरोपपत्र अदालत में पेश किया है। इस मामले में औषधि निरीक्षक जुनाब अली के बयान के आधार पर यूपी, बिहार और झारखंड तक कफ सीरप की तस्करी का आरोप लगाया गया है। मुख्य सरगना शुभम जायसवाल, उनके पिता भोला प्रसाद और 26 अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया, जिसमें जांच के दौरान कई नए नाम भी सामने आए।
पुलिस ने आरोपितों की 45 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है, जो काले कारोबार से अर्जित बताई जा रही है। एसीपी विजय प्रताप ने कहा कि कोर्ट में पुलिस पूरी गंभीरता से पैरवी करेगी। रामनगर में दर्ज मामले में भी सभी आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है।
शुभम जायसवाल को दूसरी बार भगोड़ा घोषित
दो हजार करोड़ रुपये के कफ सीरप तस्करी मामले में मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल को अपर सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार ने सोमवार को दूसरी बार भगोड़ा घोषित किया। कोर्ट के आदेश के अनुसार यदि शुभम पुलिस के हाथ नहीं आता है, तो उसकी संपत्ति कुर्क की जाएगी।
पुलिस प्रशासन पहले ही दुबई में छिपे शुभम के प्रत्यर्पण के लिए रेड कार्नर नोटिस जारी कर चुका है। वहीं, रोहनिया पुलिस के केस में गाजियाबाद के अन्य तस्करों के खिलाफ भी कार्रवाई शेष है।
घटनाक्रम
बीते साल 19 नवंबर को रोहनिया पुलिस ने भदवर स्थित एक जिम में छिपाए गए 500 से अधिक पेटी कफ सीरप बरामद किए थे। जांच में आजाद जायसवाल, महेश सिंह, भोला प्रसाद, शिवाकांत उर्फ शिवा, स्वप्निल केसरी, दिनेश यादव, मनीष यादव और शुभम यादव के नाम सामने आए। पुलिस ने सभी को सलाखों के पीछे भेज दिया, केवल शुभम के खिलाफ कार्रवाई जारी रही।
रोहनिया थाना प्रभारी ने बताया कि केस के विवेचक दारोगा दिनेश कुमार त्रिपाठी ने शुभम के खिलाफ गैर जमानती वारंट, कुर्की नोटिस और सार्वजनिक उद्घोषणा जैसी कार्रवाइयां लगातार कीं। सोमवार को कोर्ट ने पुलिस की अर्जी पर उसे भगोड़ा घोषित कर दिया। पुलिस ने इस उद्घोषणा को शुभम के निवास और कोर्ट के प्रमुख स्थान पर चस्पा किया।
शुभम पर शिकंजा कसने की समयरेखा
- 19 नवंबर 2025: 500 से अधिक पेटी कफ सीरप बरामदगी के साथ केस दर्ज।
- 22 जनवरी 2026: गैर जमानती वारंट जारी।
- 24 फरवरी: कुर्की पूर्व उद्घोषणा नोटिस जारी।
- 26 फरवरी: नोटिस सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा।
- 27 फरवरी: अखबारों में इश्तेहार प्रकाशित।
- 30 मार्च: अदालत में उपस्थित होने का अंतिम अवसर।
- 01 अप्रैल: कोर्ट में पेश न होने पर केस दर्ज।
- 05 अप्रैल: कोर्ट ने भगोड़ा घोषित किया।
इस प्रकार पुलिस लगातार कार्रवाई कर मुख्य आरोपी पर शिकंजा कस रही है, जबकि अन्य आरोपी पहले ही सलाखों के पीछे हैं।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.




















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.