असम पासपोर्ट विवाद: सुरजेवाला को क्राइम ब्रांच का समन, जांच तेज

असम में कथित पासपोर्ट विवाद को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले की जांच के तहत असम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला को समन भेजा है और उन्हें 23 मई को गुवाहाटी स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है। यह मामला मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा से जुड़े कथित पासपोर्ट विवाद से संबंधित बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस ने जांच के सभी पहलुओं को सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन एजेंसियां पूरे प्रकरण की गहनता से पड़ताल कर रही हैं।
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के बयान के बाद सुरजेवाला का नाम सामने आया, जिसके बाद मामले की जांच और तेज कर दी गई। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस पूरे विवाद में किसी बड़े राजनीतिक षड्यंत्र की कोई भूमिका रही है या नहीं। अधिकारियों के अनुसार, हर पहलू को दस्तावेजों और बयानों के आधार पर खंगाला जा रहा है।
पवन खेड़ा के आरोपों से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी के पास कथित तौर पर कई देशों के पासपोर्ट और विदेशी संपत्तियां हैं, जिनका आधिकारिक रिकॉर्ड में उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया था कि विदेशों में कुछ कंपनियों और संपत्तियों से जुड़े वित्तीय लेन-देन छिपाए गए हैं।
इन आरोपों के बाद असम में एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें धोखाधड़ी, फर्जी बयान, मानहानि और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसे कई गंभीर आरोप शामिल हैं। वहीं रिनिकी भुयान सरमा ने इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा है कि जिन दस्तावेजों का हवाला दिया गया, वे फर्जी और भ्रामक हैं।
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में कानूनी प्रक्रिया
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पहले स्पष्ट किया था कि यदि पवन खेड़ा असम में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं तो उनकी याचिका पर निष्पक्ष सुनवाई होगी। हालांकि बाद में उनकी कुछ अन्य याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
इसके बाद पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाई कोर्ट का रुख करते हुए अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की है। दूसरी ओर, असम पुलिस ने पहले भी उनकी तलाश में दिल्ली और हैदराबाद में छापेमारी की थी। अब इस मामले में अगली सुनवाई के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी कि उन्हें राहत मिलती है या नहीं।
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