तमिलनाडु में एश्योर्ड पेंशन स्कीम लागू, ओपीएस एनपीएस विवाद पर विराम की कोशिश

तमिलनाडु की राजनीति और प्रशासन में लंबे समय से चल रहे पेंशन को लेकर असमंजस पर मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने अहम पहल की है। राज्य विधानसभा में ‘तमिलनाडु एश्योर्ड पेंशन स्कीम’ (TNAPS) की घोषणा कर सरकार ने उन सरकारी कर्मचारियों को राहत देने की कोशिश की है, जो 2003 के बाद सेवा में आने के कारण पुरानी पेंशन योजना (OPS) से बाहर हो गए थे और वर्षों से इसकी बहाली की मांग कर रहे थे।
क्या है नई एश्योर्ड पेंशन स्कीम
इस योजना का लाभ 1 अप्रैल 2003 के बाद नियुक्त सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा, जो अब तक अंशदायी पेंशन योजना (CPS) के अंतर्गत आते थे। CPS में पेंशन की राशि बाजार आधारित निवेश पर निर्भर रहती थी, जिससे भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी।
नई व्यवस्था के तहत 25 साल की पात्र सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद उसके अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में सुनिश्चित किया जाएगा।
पारिवारिक पेंशन और महंगाई राहत भी शामिल
TNAPS में केवल नियमित पेंशन ही नहीं, बल्कि पारिवारिक पेंशन का प्रावधान भी किया गया है। इसके साथ ही समय-समय पर महंगाई भत्ते से जुड़ी ‘महंगाई राहत’ (DR) भी दी जाएगी। इन प्रावधानों के चलते यह योजना कई मायनों में पुरानी पेंशन व्यवस्था के करीब मानी जा रही है।
हाइब्रिड मॉडल की ओर तमिलनाडु
विशेषज्ञों के अनुसार तमिलनाडु ने पेंशन सुधार के मामले में एक संतुलित रास्ता चुना है। जहां राजस्थान और हिमाचल प्रदेश जैसे कुछ राज्यों ने पूरी तरह OPS लागू करने का निर्णय लिया, वहीं तमिलनाडु ने केंद्र सरकार की ‘यूनिफाइड पेंशन स्कीम’ की तर्ज पर एक हाइब्रिड मॉडल अपनाया है, जिससे वित्तीय बोझ और कर्मचारियों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।
छह लाख से अधिक कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
राज्य में इस फैसले का सीधा असर करीब छह लाख सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों पर पड़ेगा। हालांकि, कर्मचारी संगठनों का एक वर्ग अब भी बिना किसी अंशदान वाली पुरानी पेंशन योजना की मांग पर अड़ा हुआ है। ऐसे में आने वाले समय में इस मुद्दे पर सरकार और यूनियनों के बीच बातचीत का दौर जारी रहने की संभावना है।
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