राजा पर हमला- इतना दुस्साहस क्यूं?

पड़ौसी जनपद बिजनौर के वासी राजा भारतेंद्र सिंह जाना- पहिचाना नाम है। सांसद रहने के अलावा वे समाज सेवा में अग्रणी नेता हैं। यही कारण है कि समाज के हर वर्ग में उनका आदर-सम्मान है। उनकी सतत सक्रियता उन्हें समाज से जोड़े हुए है। एक जागरूक नेता की भांति वे सामाजिक कुरीतियों, विसंगतियों तथा बुराइयों पर ध्यान रखते हैं।
यह दुःखद स्थिति है कि समाज का बड़ा वर्ग देश की प्रगति में योगदान करने के बजाय राष्ट्रीय तथा निजी सम्पत्ति को लूटने खसोटने, चुराने, बेचने और उसे क्षति पहुंचाने में लगा रहता है। इनका दुस्साहस इतना बढ़ा हुआ है कि ये ट्रेन की पटरियां, मोबाइल टावर्स व नलकूपों के कीमती सामान, ट्रांसफार्मर, बिजली के केबिल, हरे वृक्षों की कटाई तक करने से नहीं हिचकते। गोवंश व मादक पदार्थों की तस्करी धड़ल्ले से करते हैं। नये पुराने वाहनों की चोरी और उनके कलपुर्जों को भट्टियों तक पहुंचाने से कतई गुरेज नहीं करते। कानून व्यवस्था को धता बताने में ज़रा भी नहीं हिचकते क्यूं कि वोट बैंक की राजनीति के चलते सदा गोलबंद गिरोह बंद रहते हैं। नेता,शासन, प्रशासन जानकर अनजान बना रहता है, क्योंकि वोट का सवाल है।
राजा भारतेंद्र सिंह ने हरे वृक्षों की कटान करने वालों के विरुद्ध आवाज उठाई। कुछ लोग लम्बे समय से इस धंधे में लगे हुए थे। दबंगई के चलते इस गिरोह को कोई छू भी नहीं सकता था। लगातार मिल रही शिकायतों के पश्चात वन विभाग (सामाजिक वानिकी अधिकारी) ने इनकी आरा मशीन पर छापा मार रंगे हाथ पकड़ा और कारखाने को सील कर दिया। इनका दुस्साहस देखिये कि तालाबंदी के बाद सील तोड़ दी गई और हरे वृक्षों का कटान शुरू कर दिया गया।
ड्रोन के जरिये फैक्ट्री चलने की फिल्म बनाई गई और प्रशासन को सूचित किया गया। अतिरिक्त जिला अधिकारी टीम के साथ आरा मशीन पर पहुंचे। अपनी आंखों से फैक्ट्री चलने का नजारा देखा। एडीएम साहब के पीछे राजा भारतेंद्र सिंह भी चले आये, जिन्हें देखते ही फैक्ट्री के मालिक तीन भाइयों और उनके गुर्गों ने हमला कर दिया। दरअसल हमला तो एडीएम साहब व टीम पर भी हुआ लेकिन मामला लिखत-पढ़त में नहीं आया क्यूं कि अधिकारीगण कानूनी मामलों से दूर रहना चाहते हैं।
पूर्व सांसद पर आक्रमण के बाद आरोपियों ने उल्टे उन पर ही हमला करने और रंगदारी मांगने का झूठा आरोप जड़ दिया। पुलिस ने जांच के बाद हमलावर तीनों भाइयों को गिरफ्तार कर मुकदमा दर्ज कर लिया। आरा मशीन की सील तोड़ने की प्राथमिकी भी दर्ज की गई है।
एक वर्ग इस देश की राष्ट्रीय सम्पदा को लूटना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझता है, यह ऐसा ही मामला है।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'
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