बदायूं का रायता मामला लखनऊ तक पहुंचा, गांव पिपरौल के हालात पर शासन की नजर

बदायूं जिले के उझानी क्षेत्र स्थित गांव पिपरौल में रेबीज से ग्रसित भैंस के दूध से बने दही के इस्तेमाल का मामला अब राज्य स्तर तक पहुंच गया है। तेरहवीं भोज में परोसे गए रायते को लेकर फैली आशंका के बीच भले ही प्रशासन ने स्थिति सामान्य होने की बात कही हो, लेकिन लोगों की चिंता कम नहीं हुई है। तीसरे दिन भी एहतियात के तौर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण अस्पताल पहुंचे और एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाई।
सोमवार सुबह से ही महिलाएं, पुरुष और बच्चे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचने लगे। पंजीकरण के बाद उन्हें वैक्सीन दी गई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार शाम तक करीब 120 लोगों का टीकाकरण किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि भय और अनिश्चितता के चलते वे अस्पताल आए हैं। इससे पहले भी लगभग 400 लोग एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवा चुके हैं। गांव में अब भी आशंका का माहौल बना हुआ है।
स्वास्थ्य कर्मियों ने वैक्सीन लगवाने पहुंचे लोगों को घबराने से बचने की सलाह दी। उन्हें समझाया गया कि जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि भैंस को किसी कुत्ते ने नहीं काटा था और पशुपालक ने भी स्थिति साफ कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि रेबीज दूध के जरिए नहीं फैलता, बल्कि संक्रमित पशु की लार के सीधे संपर्क से ही संक्रमण होता है।
इस पूरे मामले को लेकर लखनऊ से रिपोर्ट तलब की गई थी, जिसका जवाब शासन को भेज दिया गया है। मुख्य चिकित्साधिकारी के माध्यम से जानकारी शासन स्तर तक पहुंचाई गई है।
वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में ही वैक्सीन की व्यवस्था करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि कई परिवारों में सदस्य संख्या अधिक है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सभी लोगों का अस्पताल तक आना संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में गांव पिपरौल में टीकाकरण शिविर लगाकर वैक्सीन उपलब्ध कराई जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.





























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.