बजट 2026-27: वैश्विक प्रतिस्पर्धा और ग्रामीण विकास के लिए बड़े ऐलान

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए कहा कि यह बजट माघ पूर्णिमा और गुरु रविदास जयंती के शुभ अवसर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में कई अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने स्थिर आर्थिक स्थिति बनाए रखी है और व्यापक ढांचागत सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि आयात पर निर्भरता कम करने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और परिवारों की क्रय शक्ति मजबूत करने से देश ने 7 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि वैश्विक व्यापार और बहुपक्षीय व्यवस्था चुनौतीपूर्ण हैं, और नई तकनीक उत्पादन प्रणाली को बदल रही है। उन्होंने जोर दिया कि भारत वैश्विक बाजारों से जुड़े रहकर निर्यात बढ़ाएगा और विकास के लाभ को वंचित वर्गों और महिलाओं तक पहुंचाने का प्रयास करेगा।
रेलवे में बड़ा निवेश:
बजट भाषण में निर्मला सीतारमण ने 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की। ये कॉरिडोर शहरों को ग्रोथ हब के रूप में जोड़ेंगे। इनमें शामिल हैं:
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मुंबई–पुणे
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पुणे–हैदराबाद
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हैदराबाद–बेंगलुरु
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हैदराबाद–चेन्नई
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चेन्नई–बेंगलुरु
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दिल्ली–वाराणसी
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वाराणसी–सिलीगुड़ी
वित्त मंत्री ने बताया कि पर्यावरण के अनुकूल यात्री प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए ये पहल की जा रही हैं।
जल मार्ग और एआई कृषि टूल:
आगामी पांच वर्षों में 20 नए जल मार्ग शुरू किए जाएंगे। इसके तहत वाराणसी और पटना में जहाज मरम्मत सुविधा स्थापित होगी और समुद्री विमान के लिए वीजीएफ योजना लागू होगी। किसानों के लिए भारत विस्तार एआई एग्री टूल की घोषणा की गई, जिससे कृषि उत्पादन और प्रबंधन को नई दिशा मिलेगी।
हर जिले में गर्ल हॉस्टल और हस्तिनापुर का विकास:
बजट में हर जिले में एक गर्ल हॉस्टल बनाने की योजना शामिल है। इसके साथ ही हस्तिनापुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊँचाई देने की घोषणा की गई। केंद्र सरकार ने इसे 15 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों में शामिल किया है। अब यहां के उत्खनन स्थल आम जनता के लिए खोले जाएंगे और पर्यटकों एवं शोधार्थियों की सुविधा के लिए इंटरप्रिटेशन सेंटर्स स्थापित किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से महाभारत काल की पांडवों की राजधानी के गौरवशाली इतिहास का संरक्षण होगा और यह क्षेत्र पर्यटन एवं शिक्षा के नए द्वार खोलेगा। आम नागरिक अब भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक धरोहरों को और गहराई से समझ पाएंगे।
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