बजट 2026: हिमाचल के लिए माउंटेन ट्रेल की घोषणा, केंद्रीय वित्त मंत्री ने किया एलान

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपना लगातार नौवां बजट पेश किया। इस बार बजट में हिमाचल प्रदेश के लिए खास प्रावधान किए गए हैं। वित्तमंत्री ने घोषणा की कि राज्य में माउंटेन ट्रेल विकसित किए जाएंगे। माउंटेन ट्रेल ऐसे पथ होते हैं, जो पहाड़ी और जंगली इलाकों में पैदल यात्रा, माउंटेन बाइकिंग और अन्य रोमांचक गतिविधियों के लिए बनाए जाते हैं।
हिमाचल प्रदेश के लिए यह कदम पर्यटन को बढ़ावा देने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृति मिलने के बाद राज्य सरकार इन ट्रेल्स के लिए प्रस्ताव भेजेगी और बजट की मंजूरी के बाद चुनिंदा ट्रेकिंग रूट का विकास किया जाएगा।
हिमाचल के प्रमुख ट्रेकिंग रूट
राज्य का सबसे लंबा ट्रेक पिन पार्वती घाटी में स्थित है। यह 110 किलोमीटर लंबा मार्ग मणिकर्ण से शुरू होकर लाहुल घाटी तक जाता है। इस ट्रेक का पार्वती दर्रा 5400 मीटर ऊँचाई तक पहुंचता है और सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
कांगड़ा जिले की धौलाधार रेंज में कुल 17 ट्रेकिंग रूट हैं, जिनमें से पांच जोखिम भरे, तीन मध्यम और नौ आसान श्रेणी के हैं। आसान ट्रेकिंग रूटों में शामिल हैं नड्डी-करेरी वाया रावा, सतोवरी घेरा-करेरी, इंद्रुनाग-भंगरोटू करथानी-त्रियुंड, बिलिंग-राजगुंधा-लोहारड़ी-ज्वारा और नड्डी-गुणा टेंपल।
कम जोखिम वाले ट्रेक में करेरी लेक वाया बलेनी पास, जदरांगल-करडियाणा-भौंट हिमानी चामुंडा और गज पास घेरा-बोंठू शामिल हैं। वहीं, टंग नरवाणा-खेतल अलूड-हिमानी चामुंडा बर्ड्स पैराडाइज, जिया सूपधार-तालंग लेक, राजगुंधा-थमसर-बड़ा भंगाल, गलू-धर्मकोट-होली-मणिमहेश और सेवन लेक धौलाधार रेंज जैसे ट्रेक जोखिम भरे माने जाते हैं।
छोटे राज्यों के लिए वित्तीय चुनौती
हालांकि हिमाचल प्रदेश के लिए यह बजट पर्यटन और अवसंरचना के लिहाज से सकारात्मक है, वहीं 16वें वित्तायोग ने छोटे राज्यों के लिए आरडीजी ग्रांट देने की सिफारिश नहीं की है। इस कारण राज्य को करीब 40,000 करोड़ रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। 15वें वित्तायोग में हिमाचल प्रदेश को इसी मद में 35-40 हजार करोड़ की सहायता मिली थी।
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