बुलेट ट्रेन का सपना साकार होने की ओर, रेल मंत्रालय ने दिखाई पहली झलक

भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR) को लेकर तेजी से काम आगे बढ़ रहा है और इसके कई अहम अपडेट सामने आए हैं। रेल मंत्रालय की ओर से इस महत्वाकांक्षी परियोजना की एक झलक नई दिल्ली स्थित रेल भवन के गेट नंबर-4 पर प्रदर्शित की गई है, जिसे देश के हाई स्पीड रेल विकास में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जापान के सहयोग से बन रहा हाई स्पीड कॉरिडोर
यह 508 किलोमीटर लंबा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर भारत और जापान के सहयोग से विकसित किया जा रहा है। जापान इस परियोजना में तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। यह मार्ग महाराष्ट्र, गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगा।
इस पूरे रूट पर 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जिनमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं।
इस साल शुरू हो सकता है ट्रायल रन
रेल मंत्रालय के अनुसार, उम्मीद की जा रही है कि इस साल सूरत और बिलिमोरा के बीच बुलेट ट्रेन का ट्रायल या आंशिक संचालन शुरू किया जा सकता है। रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw पहले ही संसद में जानकारी दे चुके हैं कि 12 में से 8 स्टेशनों की नींव का काम पूरा हो चुका है।
इनमें वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, आनंद, वडोदरा, अहमदाबाद और साबरमती स्टेशन शामिल हैं। साथ ही 17 नदी पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि नर्मदा, माही, ताप्ती और साबरमती जैसी बड़ी नदियों पर पुलों का काम तेजी से जारी है।
समुद्र के नीचे सुरंग का काम जारी
मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्टेशन का निर्माण भी तेज गति से चल रहा है, जहां खुदाई का लगभग 91 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
इसके अलावा, परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा मानी जाने वाली समुद्र के नीचे बनने वाली करीब 21 किलोमीटर लंबी सुरंग (अंडर-सी टनल) पर भी काम शुरू हो चुका है। महाराष्ट्र के घनसोली और शिलफाटा के बीच लगभग 4.8 किलोमीटर सुरंग का निर्माण पूरा किया जा चुका है।
हाई स्पीड ट्रेन निर्माण की तैयारी
वंदे भारत ट्रेनों की सफलता के बाद अब इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) और भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) मिलकर 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हाई स्पीड ट्रेन विकसित करने में जुटे हैं।
‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा
रेलवे का मानना है कि यह परियोजना भारत को हाई स्पीड रेल तकनीक में आत्मनिर्भर बनाएगी। ट्रैक निर्माण, सिग्नलिंग सिस्टम, ट्रेन निर्माण और रखरखाव जैसी तकनीकों में देश को बड़ी विशेषज्ञता हासिल होगी।
सरकार का कहना है कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की गई है और प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा भी दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद देश में रेल यात्रा के अनुभव में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और भविष्य में अन्य हाई स्पीड कॉरिडोर के रास्ते भी खुलेंगे।
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