अब युद्ध आमने-सामने नहीं, तकनीक आधारित हो चुका है संघर्ष: CDS चौहान

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने भारतीय सेना के बदलते स्वरूप और आधुनिक युद्ध प्रणाली को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए हैं। उन्होंने अपने सैन्य करियर के अनुभवों को याद करते हुए सेना के मानवीय जुड़ाव और तकनीकी रूप से उन्नत युद्ध रणनीतियों पर विस्तार से बात की।
जनरल चौहान ने बताया कि उन्होंने मणिपुर के सेनापति जिले में 59वीं ब्रिगेड और बारामूला में 19वीं ब्रिगेड की कमान संभाली थी, जहां लंबे समय तक उग्रवाद जैसी चुनौतियां रहीं। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में सेना की भूमिका केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं होती, बल्कि वहां “मानवीय भूगोल” और स्थानीय लोगों से जुड़ाव भी बेहद अहम होता है। उनके अनुसार, आज भी उन इलाकों के लोग उनसे संपर्क करते हैं, जो उस समय बने रिश्तों की गहराई को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्षों बाद वे बारामूला दोबारा गए, लेकिन सेनापति जिले का दौरा अब तक नहीं कर पाए, जिसकी उनकी लंबे समय से इच्छा रही है। इसके साथ ही उन्होंने उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में नेलांग और जादुंग गांवों के पुनर्वास को एक सकारात्मक उपलब्धि बताया।
आधुनिक सैन्य अभियानों पर बात करते हुए सीडीएस ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक नई तरह की सैन्य रणनीति का उदाहरण बताया। उनके अनुसार यह अभियान पारंपरिक युद्धों से बिल्कुल अलग था और इसमें तीनों सेनाओं ने मिलकर समन्वित तरीके से काम किया। उन्होंने इसे एक मल्टी-डोमेन और “नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर” का उदाहरण बताया, जिसमें सीधे आमने-सामने की लड़ाई के बजाय तकनीकी और रणनीतिक क्षमता का उपयोग किया गया।
जनरल चौहान ने बताया कि इस ऑपरेशन में स्पेस और साइबर टेक्नोलॉजी जैसी आधुनिक तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। भले ही इसका मुख्य चरण करीब 88 घंटे चला, लेकिन इसके पीछे व्यापक स्तर पर सेना, वायुसेना, नौसेना और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय था।
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के अभियानों में “जीत” की परिभाषा भी बदल चुकी है। आधुनिक युद्ध में सटीकता और तकनीकी क्षमता ही सबसे बड़ा पैमाना बन गई है, जहां लंबी दूरी से भी अत्यंत सटीक कार्रवाई संभव हो गई है। उनके अनुसार, यह बदलाव भारतीय सैन्य इतिहास में एक नए युग की शुरुआत का संकेत देता है।
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