आरटीई प्रवेश नियमों में बदलाव, किराए के मकान में रहने वाले बच्चों को नहीं मिलेगा लाभ

नई दिल्ली: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया में नए बदलाव लागू किए गए हैं। अब केवल पंजीकृत घरों में रहने वाले बच्चों को ही आरटीई के तहत प्रवेश का लाभ मिलेगा। किराए के मकान में रहने वाले बच्चों को आरटीई सीटों के लिए पात्र नहीं माना जाएगा। साथ ही, बच्चों के यूनिफॉर्म का खर्च सीधे उनके अभिभावकों के बैंक खाते में निदेशालय स्तर से भेजा जाएगा, जिसके लिए बैंक खाते का आधार से सत्यापन आवश्यक होगा।
राजधानी में 1576 निजी स्कूलों में आरटीई के तहत लगभग 21,000 सीटों के लिए आवेदन प्रक्रिया 2 फरवरी से ऑनलाइन शुरू होगी। बेसिक शिक्षा विभाग ने बताया कि प्रवेश के लिए सभी दस्तावेजों की ऑनलाइन कॉपी विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। संबंधित स्कूलों के प्रबंधक और प्रधानाचार्य यूजर आईडी के जरिए बच्चों के दस्तावेजों की जांच कर सकेंगे, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के प्रवेश में पारदर्शिता बनी रहे।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार के अनुसार, पिछले वर्ष 1398 निजी स्कूलों में लगभग 18,000 सीटों के लिए आवेदन प्राप्त हुए थे। इस वर्ष स्कूलों की संख्या बढ़ने के साथ सीटों की संख्या भी बढ़ाई गई है। निजी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चों की फीस विभाग की ओर से प्रदान की जाएगी और संबंधित स्कूलों से डाटा एकत्र किया गया है।
आवेदन प्रक्रिया:
पहले चरण में नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी और कक्षा 1 में प्रवेश के लिए आवेदन 2 से 16 फरवरी तक होंगे। द्वितीय चरण के लिए 21 फरवरी से 7 मार्च और तृतीय चरण के लिए 12 से 25 मार्च तक आवेदन किए जा सकेंगे। दस्तावेजों की जांच के बाद पहली लॉटरी 18 फरवरी को, दूसरी लॉटरी 9 मार्च को और तीसरी लॉटरी 27 मार्च को जारी होगी।
आवश्यक दस्तावेज:
आरटीई प्रवेश केवल शहर में रहने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए है। जिला शिक्षा परियोजना समिति के आदेश के अनुसार, प्रवेश के समय तहसीलदार द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, ग्रामीण क्षेत्र में जॉब कार्ड, चिकित्सा प्रमाणपत्र और आधार कार्ड आवश्यक होंगे। केवल इन दस्तावेजों के उपलब्ध होने पर ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।
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