पेशेवर अपराधी और माफिया को जेलों में रखने की जरूरत: सीएम योगी

HIGHLIGHTS
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कारागार विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में जेल सुधार और व्यवस्थाओं को लेकर कई अहम निर्देश दिए।
- उन्होंने कहा कि जेलों को केवल बंदियों को रखने की जगह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इन्हें सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
- सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि जेल व्यवस्था मुख्य रूप से गंभीर और संगठित अपराधियों तथा माफिया तत्वों के लिए होनी चाहिए, जबकि छोटे अपराधों से जुड़े मामलों में ओपन जेल प्रणाली को अधिक…
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कारागार विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में जेल सुधार और व्यवस्थाओं को लेकर कई अहम निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जेलों को केवल बंदियों को रखने की जगह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इन्हें सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि जेल व्यवस्था मुख्य रूप से गंभीर और संगठित अपराधियों तथा माफिया तत्वों के लिए होनी चाहिए, जबकि छोटे अपराधों से जुड़े मामलों में ओपन जेल प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने कारागार विभाग में लंबे समय से खाली चल रहे पदों को जल्द भरने के निर्देश भी दिए।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि 75 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग कैदियों, गंभीर व असाध्य रोगों से पीड़ित बंदियों, जेल में बच्चों के साथ रह रही महिला कैदियों तथा आर्थिक कारणों से जमानत राशि जमा न कर पाने वाले कैदियों की विस्तृत सूची तैयार की जाए, ताकि उनके मामलों पर मानवीय दृष्टिकोण से विचार किया जा सके।
विभागीय समीक्षा में बताया गया कि वर्तमान में विभिन्न श्रेणियों के कुल 3647 पद रिक्त हैं, जिन पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। वर्ष 2017 से अब तक 4055 नियुक्तियां की जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरा जाए।
जेलों में बंदियों की समयपूर्व रिहाई के आंकड़े भी बैठक में प्रस्तुत किए गए। जानकारी के अनुसार वर्ष 2012-16 के बीच 273 बंदियों को समय से पहले रिहाई मिली, जबकि 2017-21 के दौरान यह संख्या बढ़कर 2882 और 2022-26 के बीच 3846 तक पहुंच गई।
सीएम ने ओपन जेल व्यवस्था के विस्तार के लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार करने को कहा, जिससे जेलों में भीड़भाड़ की समस्या को कम किया जा सके। बताया गया कि वर्ष 2017 में प्रदेश की 70 जेलों की क्षमता 58,400 थी, जबकि उस समय बंदियों की संख्या 96,383 थी, जिससे ओवरक्राउडिंग दर 1.77 दर्ज की गई थी।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि पिछले वर्षों में चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा, प्रयागराज, श्रावस्ती और बरेली में सात नए कारागार शुरू किए गए हैं, जिससे 10,495 अतिरिक्त बंदी क्षमता विकसित हुई है। इसके अलावा अमेठी, महोबा, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में छह नए कारागारों का निर्माण कार्य चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली को और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया।
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