मानसून सत्र के सत्रावसान में देरी पर कांग्रेस का सवाल, जयराम रमेश ने उठाई विशेष सत्र की आशंका

HIGHLIGHTS
- मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ था।
- कांग्रेस के मुताबिक आमतौर पर सत्रावसान में दो से चार दिन लगते हैं।
- जयराम रमेश ने देरी को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए।
नई दिल्ली। कांग्रेस ने संसद के मानसून सत्र का सत्रावसान होने में हो रही असामान्य देरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का कहना है कि आमतौर पर संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने और सत्रावसान का नोटिफिकेशन जारी होने के बीच दो से चार दिन का अंतर होता है।
हालांकि, 13 अगस्त को मानसून सत्र स्थगित होने के कई दिन बाद भी इसे आधिकारिक रूप से समाप्त नहीं किया गया है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर इस देरी पर सवाल उठाए। उन्होंने आशंका जताई कि क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक मकसद है।
जयराम रमेश ने सवाल किया कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रहे हैं और इसके लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश में हैं? हालांकि, सरकार की ओर से विशेष सत्र बुलाने की किसी योजना से स्पष्ट रूप से इनकार किया गया है।
पहले भी सत्रावसान में हुई है देरी
जयराम रमेश ने कहा कि पहले भी संसद के सत्रावसान में देरी के मामले सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि 2015 में मानसून सत्र स्थगित होने के 28 दिन बाद और 2021 में 20 दिन बाद सत्रावसान हुआ था। हालांकि, उन्होंने कहा कि उस समय पृष्ठभूमि में कोई राजनीतिक जोड़-तोड़ या रणनीतिक गतिविधियां नहीं चल रही थीं।
परिसीमन का मुद्दा
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब हाल ही में महाबलीपुरम में हुई दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में परिसीमन का मुद्दा प्रमुखता से उठा था। बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर अपनी बात रखी थी।
उन्होंने केंद्र से लिखित आश्वासन की मांग की थी कि जनसंख्या नियंत्रण के मामले में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों की लोकसभा सीटों का प्रतिशत कम नहीं किया जाए। वहीं, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अगले 25 वर्षों तक देश में लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या 543 बनाए रखने की मांग की थी।
संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति, सरकार की सिफारिश पर संसद का सत्र बुलाते हैं और उसका सत्रावसान करते हैं। 20 जुलाई से शुरू हुआ मानसून सत्र हंगामे के कारण काफी प्रभावित रहा और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 13 अगस्त को स्थगित कर दिया गया था।
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