आजम खां की जौहर यूनिवर्सिटी पर शिकंजा, सरकारी धन के इस्तेमाल और ठेकों में गड़बड़ी के आरोप

HIGHLIGHTS
- सरकारी धन से बने पंडाल का स्वामित्व विश्वविद्यालय को सौंपने पर भी सवाल उठे।
- परिसर की 59 इमारतों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
- जब्ती पर अंतिम निर्णय नई दिल्ली स्थित निर्णायक प्राधिकरण करेगा।
समाजवादी पार्टी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे आजम खां के प्रभाव के चलते जौहर यूनिवर्सिटी में सरकारी धन से बनने वाले भवनों के ठेके कथित तौर पर दोगुनी कीमत पर दिए जाते रहे। आरोप है कि निर्माण कार्य में नियमों की अनदेखी की गई और रामपुर शहर के दूसरे विकास कार्यों के लिए लाई गई निर्माण सामग्री का इस्तेमाल भी विश्वविद्यालय की इमारतें बनाने में किया गया।
इन कथित अनियमितताओं के दौरान जिम्मेदार रहे अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विश्वविद्यालय की इमारतों को जब्त किया है, लेकिन जांच में वास्तविक जिम्मेदार लोगों की पहचान का मुद्दा भी सामने आया है। ईडी की जांच के मुताबिक, रामपुर के कई ठेकेदारों ने सरकारी ठेकों से मिली धनराशि और निर्माण सामग्री को विश्वविद्यालय के निर्माण में लगाया।
एक कंपनी के प्रबंध निदेशक ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि 186 करोड़ रुपये के ठेकों का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल किया गया। वहीं, एक अन्य संस्थान ने आजम खां के प्रभाव में ट्रस्ट को 40 लाख रुपये दान दिए थे।
आयकर जांच में भी सामने आए थे ऐसे तथ्य
आयकर विभाग की जांच में भी इसी तरह के तथ्य सामने आए थे। इन्हीं के आधार पर ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द कर दिया गया था। विश्वविद्यालय परिसर में विधायक निधि से भी 6.60 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए गए थे।
ईडी के अनुसार, ये काम लोक निर्माण विभाग ने कराए थे। उस समय विभाग के अध्यक्ष आजम खां थे। इसके अलावा ट्रस्ट को मेरठ के दो शैक्षणिक संस्थानों से 6.24 करोड़ रुपये का चंदा मिला था। इन संस्थानों को भाजपा नेता सरोजनी अग्रवाल से जुड़ा बताया जाता है। उस समय वह समाजवादी पार्टी में थीं।
सार्वजनिक धन से बनी संपत्ति का स्वामित्व विश्वविद्यालय को देने का आरोप
जांच में सामने आया कि सपा सरकार के कार्यकाल में विश्वविद्यालय परिसर में एक पंडाल, अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए छात्रावास और एक अस्पताल बनाने की मंजूरी दी गई थी। इन निर्माण कार्यों के लिए 23.41 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे।
वर्ष 2015 में जारी सरकारी आदेश के तहत पंडाल के निर्माण के लिए 12.16 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। इसमें शर्त थी कि संपत्ति का स्वामित्व संस्कृति विभाग के पास रहेगा और सरकारी स्तर पर इसका निशुल्क इस्तेमाल किया जा सकेगा।
हालांकि, वर्ष 2016 में जारी एक अन्य आदेश के जरिए इन शर्तों में बदलाव कर दिया गया। पंडाल का स्वामित्व विश्वविद्यालय को सौंप दिया गया और राज्य सरकार के इस्तेमाल से जुड़ी शर्त भी हटा दी गई। इस तरह सरकारी धन से तैयार सार्वजनिक संपत्ति को विश्वविद्यालय की निजी संपत्ति में बदलने का आरोप है। उस समय शहरी विकास विभाग की जिम्मेदारी आजम खां के पास थी।
निर्णायक प्राधिकरण करेगा जब्ती पर अंतिम फैसला
विश्वविद्यालय की इमारतों को ईडी द्वारा जब्त किए जाने के बाद अब मामला नई दिल्ली स्थित निर्णायक प्राधिकरण (एडजुकेटिंग अथॉरिटी) के समक्ष जाएगा। प्राधिकरण छह महीने के भीतर ईडी की जब्ती की कार्रवाई पर अंतिम फैसला करेगा। यदि निर्णय ईडी के पक्ष में आता है, तो जब्त की गई संपत्तियां सरकारी हो जाएंगी। विश्वविद्यालय का संचालन किस तरह होगा, इस पर आगे का निर्णय सरकार ले सकती है।
बताया गया है कि सरकार जब्त भवनों का कब्जा लेती है, तब भी पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। फीस के जरिए सरकारी राजस्व को हुए नुकसान की भरपाई की जा सकती है।
इससे पहले ईडी सहारनपुर के खनन माफिया और पूर्व बसपा एमएलसी हाजी इकबाल की ग्लोकल यूनिवर्सिटी को भी जब्त कर चुकी है। इसकी कीमत करीब 4,500 करोड़ रुपये बताई गई थी। इसके अलावा राजधानी में छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में हाइजिया ग्रुप की इमारतों को भी ईडी ने जब्त किया था।
13 अक्टूबर की एफआईआर के बाद से जताई जा रही थी जब्ती की आशंका
जौहर यूनिवर्सिटी की संपत्तियों को जब्त किए जाने की आशंका उस समय से जताई जा रही थी, जब 13 अक्टूबर की रात ईडी ने अजीमनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। अब संपत्तियों की जब्ती के साथ यह आशंका सच साबित हुई है।
ईडी ने अजीमनगर थाने में दर्ज 27 प्राथमिकियों के आधार पर जांच शुरू की थी। इन मामलों में विश्वविद्यालय के लिए किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा करने के आरोप लगाए गए थे। बाद में जांच का दायरा जमीन से आगे बढ़कर भवनों के निर्माण में इस्तेमाल धन और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन तक पहुंच गया।
हाल ही में ईडी ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों से जुड़े ठिकानों पर भी छापेमारी की थी। जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय की संपत्तियों और उनके निर्माण में इस्तेमाल धन के स्रोत का मामला फिर चर्चा में आ गया है।
करीब सात साल तक चली जांच के बाद हुई जब्ती की कार्रवाई में अब संपत्तियों के स्वामित्व के साथ-साथ उनके निर्माण और वित्तपोषण से जुड़े सवाल भी अहम हो गए हैं। ईडी के मुताबिक, जांच में यह बात सामने आई कि सरकारी ठेके हासिल करने वाले ठेकेदारों से मिली रकम ट्रस्ट तक दान के रूप में पहुंचाई गई।
आजम खां से आठ घंटे पूछताछ के बाद दर्ज हुई थी एफआईआर
जौहर यूनिवर्सिटी में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामले में ईडी ने 4 अक्टूबर को रामपुर पहुंचकर जेल में बंद सपा नेता आजम खां से पूछताछ की थी। इसके बाद एजेंसी ने आजम खां और जौहर ट्रस्ट के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराओं में अजीमनगर थाने में मामला दर्ज कराया था। इस कार्रवाई के करीब एक पखवाड़े बाद संपत्तियों को जब्त किया गया।
सपा के जिलाध्यक्ष अजय सागर ने कहा कि उन्हें ईडी की कार्रवाई की जानकारी मीडिया के जरिए मिली है। उनके मुताबिक, अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई सूचना नहीं आई है। सूचना मिलने के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
जौहर यूनिवर्सिटी मामले में प्रमुख घटनाक्रम
2013-2017: ईडी के आरोपों के मुताबिक, इस अवधि में सरकारी ठेकों और सार्वजनिक धन के विश्वविद्यालय निर्माण में इस्तेमाल की जांच की गई। एजेंसी ने किसानों की कृषि भूमि पर कथित कब्जे से संबंधित अजीमनगर थाने में दर्ज 27 प्राथमिकियों के आधार पर जांच शुरू की।
12 मई 2022: ईडी ने विश्वविद्यालय परिसर का निरीक्षण किया और कथित शत्रु संपत्ति की पैमाइश की गई।
10 नवंबर 2023: जिला मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट में परिसर की 59 इमारतों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई।
19 अगस्त 2026: ईडी ने विश्वविद्यालय और उससे जुड़े परिसरों में तलाशी ली। इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त किए गए।
13 अक्टूबर 2026: ईडी ने रामपुर जेल में आजम खां से करीब आठ घंटे पूछताछ की।
13 अक्टूबर 2026: आजम खां, जौहर ट्रस्ट और अन्य के खिलाफ अजीमनगर थाने में नई प्राथमिकी दर्ज की गई।
22 अक्टूबर 2026: आजम खां के करीबी सालिम से ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन और चंदे के संबंध में करीब आठ घंटे पूछताछ हुई।
28 अक्टूबर: ईडी ने विश्वविद्यालय की जमीन और भवनों को अस्थायी रूप से जब्त किया। इन संपत्तियों का कथित अपराध से अर्जित मूल्य 426.46 करोड़ रुपये और मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये बताया गया।
विधायक आकाश सक्सेना ने आजम खां पर लगाए आरोप
शहर विधायक और शिकायतकर्ता आकाश सक्सेना ने आरोप लगाया कि जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में काले धन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि आजम खां ने यह विश्वविद्यालय शिक्षा के उद्देश्य से नहीं, बल्कि अपने निजी फायदे के लिए बनाया था।
सक्सेना के मुताबिक, ईडी ने विस्तृत जांच के बाद जब्ती की कार्रवाई की है और यह एक बड़ा कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि आजम खां शिक्षा के नाम पर विश्वविद्यालय का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर रहे थे।
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