दारुल उलूम ने शुरुआती अरबी कक्षाओं में बाहरी छात्रों के प्रवेश पर रोक लगाई

सहारनपुर। उत्तर भारत के प्रमुख इस्लामी शिक्षा केंद्र दारुल उलूम, देवबंद ने नए साल की शुरुआत में अपनी शिक्षा नीति में बड़ा बदलाव किया है। संस्था की अकादमिक परिषद की बैठक में निर्णय लिया गया कि अब अरबी की शुरुआती कक्षाओं (कक्षा 1 से कक्षा 3) में बाहरी छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। हालांकि, यह नियम स्थानीय छात्रों और दारुल उलूम के कर्मचारियों के बच्चों पर लागू नहीं होगा।
प्रवेश पर रोक और व्यवस्था का उद्देश्य
दारुल उलूम के शिक्षा प्रभारी मौलाना हुसैन हरिद्वारी ने बताया कि इस निर्णय का उद्देश्य शुरुआती कक्षाओं में शिक्षा की गुणवत्ता और अनुशासन बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि बाहरी छात्रों को अब अपनी प्रारंभिक तालीम अपने स्थानीय या पुराने मदरसों में पूरी करनी होगी। इसके बाद ही वे दारुल उलूम में आगे की पढ़ाई के लिए आवेदन कर सकते हैं।
मौलाना हुसैन ने यह भी बताया कि पिछले वर्षों से यह सिफारिश की जा रही थी कि अरबी की शुरुआती कक्षाओं में छात्रों को बेहतर तालीम दी जाए। लेकिन कई बार बड़ी संख्या में छोटे छात्र सीधे दारुल उलूम में दाखिला लेने आ जाते हैं, जिससे शैक्षणिक और प्रशासनिक चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं।
स्थानीय छात्रों को दी गई छूट
नई नीति के तहत देवबंद के स्थानीय छात्र, दारुल उलूम के उस्तादों और कर्मचारियों के बच्चे शुरुआती कक्षाओं में प्रवेश ले सकते हैं। प्रबंधन का मानना है कि इस बदलाव से शिक्षा व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और प्रभावी होगी।
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