LPG संकट में ‘देसी जुगाड़’! अरुणाचल में गोबर से बन रही गैस

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण देश के कई हिस्सों में एलपीजी की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस स्थिति से निपटने के लिए राज्यों ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर जोर देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में अरुणाचल प्रदेश ने एक अहम पहल करते हुए ईटानगर के पास निर्जुली स्थित सेंट्रल कैटल ब्रीडिंग फार्म (CCBF) में बायोगैस प्लांट स्थापित किया है।
पशुपालन, पशुचिकित्सा और डेयरी विकास विभाग के मंत्री गेब्रियल डी. वांगसू के निर्देश पर यहां 30 क्यूबिक मीटर क्षमता वाला दो यूनिट का बायोगैस प्लांट तेजी से चालू किया गया। यह संयंत्र गोबर से गैस तैयार कर उसे खाना पकाने और अन्य जरूरतों के लिए इस्तेमाल करने में सक्षम है।
निर्जुली स्थित इस फार्म में करीब 150 मवेशी हैं, जिनसे प्रतिदिन 5 से 6 क्विंटल गोबर एकत्र होता है। पहले इस गोबर का उपयोग मुख्य रूप से खाद बनाने में किया जाता था, लेकिन अब इसे बायोगैस में बदलकर ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस प्रक्रिया से निकलने वाला स्लरी भी खेतों के लिए उपयोगी जैविक खाद का काम करता है।
विभाग के सचिव वाईवीवी जे. राजशेखर के अनुसार, फार्म परिसर में रहने वाले एक दर्जन से अधिक परिवारों को इस बायोगैस प्लांट से जोड़ा गया है। इससे उनकी रसोई में एलपीजी की जरूरत काफी हद तक कम हो गई है। उन्होंने बताया कि मौजूदा हालात को देखते हुए इस परियोजना को प्राथमिकता के साथ पूरा किया गया, ताकि स्थानीय लोगों को राहत मिल सके।
सरकार अब इस पहल को आगे बढ़ाने की योजना बना रही है। मंत्री वांगसू ने विभाग को निर्देश दिए हैं कि ऐसे बायोगैस प्लांट अन्य सरकारी फार्मों में भी स्थापित किए जाएं। उनका मानना है कि पशु अपशिष्ट का बेहतर उपयोग न केवल स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जैविक खेती को भी बढ़ावा देता है।
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, यह पहल टिकाऊ विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने के साथ-साथ एलपीजी पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी।
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