डीआरडीओ को बड़ी सफलता: 120 किमी रेंज वाले पिनाका रॉकेट का सफल परीक्षण

देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूती देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सोमवार को पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण किया। लगभग 120 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम इस रॉकेट का परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित परीक्षण केंद्र से किया गया। इस उपलब्धि पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ और इससे जुड़े सभी संगठनों को बधाई दी है।
पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (एमबीआरएल) को भारत की स्वदेशी आर्टिलरी शक्ति का अहम आधार माना जा रहा है। लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने की क्षमता के साथ यह प्रणाली आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई है।
स्वदेशी तकनीक से बना, ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मजबूती
पिनाका रॉकेट प्रणाली का डिज़ाइन और विकास डीआरडीओ द्वारा किया गया है, जबकि इसके निर्माण और आपूर्ति में भारतीय रक्षा उद्योग की महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। यह पूरी तरह स्वदेशी हथियार प्रणाली है, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति देती है।
शुरुआत में पिनाका रॉकेट की मारक क्षमता लगभग 40 किलोमीटर तक सीमित थी। इसके बाद तकनीकी उन्नयन के जरिए इसकी रेंज पहले 60 और फिर 75 किलोमीटर तक बढ़ाई गई। अब 120 किलोमीटर रेंज वाला संस्करण भारत को विश्व की उन्नत रॉकेट आर्टिलरी प्रणालियों की श्रेणी में खड़ा करता है।
उन्नत गाइडेंस और उच्च सटीकता
नए पिनाका गाइडेड रॉकेट में अत्याधुनिक मार्गदर्शन प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है। इसमें इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) के साथ सैटेलाइट आधारित गाइडेंस शामिल है, जिससे लक्ष्य पर बेहद सटीक प्रहार संभव हो पाता है। इससे लक्ष्य से विचलन कम होता है और अनावश्यक क्षति (कोलेटरल डैमेज) घटती है।
तेज फायरिंग और ‘शूट एंड स्कूट’ क्षमता
पिनाका सिस्टम की खासियत इसकी तेज फायरिंग क्षमता है। एक ही लॉन्चर से कुछ सेकंड में कई रॉकेट दागे जा सकते हैं, जिससे बड़े इलाके को कम समय में प्रभावी रूप से कवर किया जा सकता है। इसके साथ ही यह ‘शूट एंड स्कूट’ तकनीक से लैस है, यानी फायरिंग के तुरंत बाद लॉन्चर स्थान बदल सकता है, जिससे दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से बचाव संभव होता है।
विविध वारहेड और हर इलाके में प्रभावी
इन रॉकेट्स में हाई एक्सप्लोसिव, प्री-फ्रैगमेंटेड और एरिया सैचुरेशन जैसे विभिन्न प्रकार के वारहेड लगाए जा सकते हैं। इसके जरिए दुश्मन के बंकर, सैन्य ठिकाने, लॉजिस्टिक केंद्र, रनवे और बख्तरबंद वाहनों को प्रभावी ढंग से निशाना बनाया जा सकता है।
पिनाका सिस्टम को इस तरह तैयार किया गया है कि यह रेगिस्तानी, पहाड़ी और अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों सहित हर तरह के भौगोलिक और मौसमीय हालात में काम कर सके। यह दिन-रात संचालन में सक्षम है। व्हील्ड प्लेटफॉर्म पर आधारित होने के कारण इसकी तैनाती और आवाजाही भी तेज है।
सेना की मारक क्षमता में होगा बड़ा इजाफा
भारतीय सेना पहले ही पिनाका रॉकेट रेजीमेंट्स को अपनी आर्टिलरी यूनिट्स में शामिल कर चुकी है। 120 किलोमीटर रेंज वाला यह नया संस्करण सेना को दुश्मन के अंदरूनी ठिकानों तक सटीक हमला करने की क्षमता देगा। इससे भारत की सामरिक बढ़त और प्रतिरोधक क्षमता दोनों और मजबूत होंगी।
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