रेलवे रिश्वत मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, 3.28 करोड़ का फ्लैट और नकदी अटैच

HIGHLIGHTS
- कार्रवाई ईडी के गुवाहाटी जोनल ऑफिस की ओर से की गई।
- अटैच संपत्तियों में पटना का रिहायशी फ्लैट शामिल है।
- सोनल जैन के नाम पर केनरा बैंक का टर्म डिपॉजिट भी अटैच किया गया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गुवाहाटी जोनल ऑफिस ने रंजीत कुमार बोराह और अन्य से जुड़े मामले में 3.50 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। रंजीत कुमार बोराह उस समय नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे, मालीगांव, गुवाहाटी में डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे।
जब्त की गई संपत्तियों में पटना में सोनल जैन के नाम पर मौजूद करीब 3.28 करोड़ रुपये कीमत का रिहायशी फ्लैट और केनरा बैंक में उनके नाम पर करीब 21.24 लाख रुपये का टर्म डिपॉजिट शामिल है। जांच के दौरान रेलवे अधिकारी रंजीत कुमार बोराह का 2024 में निधन हो गया था।
ईडी ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई), एसी-I, नई दिल्ली की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर मामले की जांच शुरू की थी। यह एफआईआर रंजीत कुमार बोराह और अन्य के खिलाफ आईपीसी, 1860 की धारा 120-B और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 की 2018 में संशोधित धाराओं 7 और 8 के तहत दर्ज की गई थी।
आरोप था कि उन्होंने नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे में कॉन्ट्रैक्ट देने और उन्हें पूरा कराने के बदले निजी ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए अवैध रिश्वत की मांग की थी। बाद में रिश्वत स्वीकार करने का भी आरोप है। सीबीआई ने 14 दिसंबर 2021 को रिश्वत की रकम की डिलीवरी को रोकते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने 2022 में मामले में चार्जशीट दाखिल की थी।
ईडी की जांच में सामने आया कि रंजीत कुमार बोराह ने सनशाइन नाम की रेलवे कॉन्ट्रैक्टर फर्म के मालिक चिंतन जैन और नयन चंद्र जैन से रिश्वत मांगी और स्वीकार की। रिश्वत की रकम उन्हीं के पास रखी गई थी। अपराध से प्राप्त इस रकम का इस्तेमाल सनशाइन के नाम पर गुरुग्राम, हरियाणा के प्लैटिनम टावर्स में एक फ्लैट खरीदने के लिए किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि उक्त फ्लैट को 2024 में 3.5 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। बिक्री से प्राप्त रकम को सनशाइन, चिंतन जैन और उनकी पत्नी सोनल जैन के बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर किया गया।
बाद में इस रकम का इस्तेमाल पटना में पहले से खरीदे गए रिहायशी फ्लैट के लिए लिए गए होम लोन को चुकाने और सोनल जैन के नाम पर केनरा बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने के लिए किया गया।
ईडी के अनुसार, अटैच की गई संपत्तियां स्वर्गीय रंजीत कुमार बोराह की ओर से अपराध से अर्जित रकम के पुनर्निवेश और एकीकरण को दर्शाती हैं। जांच के दौरान रंजीत कुमार बोराह का निधन हो गया था। चूंकि पीएमएलए के तहत अटैचमेंट की कार्रवाई विवादित संपत्ति के खिलाफ होती है, इसलिए मौजूदा मालिकों के पास मौजूद संबंधित संपत्तियों को अटैच किया गया है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.



















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.