अमरकंटक में साल बोरर कीट से प्रभावित 9,500 पेड़ों की कटाई शुरू, वन विभाग को मिली मंजूरी

HIGHLIGHTS
- साल बोरर कीट से प्रभावित 9,500 पेड़ चिह्नित।
- 5,157.34 हेक्टेयर वन क्षेत्र में किया गया था सर्वे।
- जून-जुलाई में कीटों को नष्ट करने के लिए ट्रैप-ट्री ऑपरेशन चलाया गया।
अनूपपुर। अमरकंटक के वन क्षेत्रों में मध्य प्रदेश वन विभाग ने साल बोरर कीट से प्रभावित 9,500 साल के पेड़ों को चिह्नित किया है। इन पेड़ों की कटाई के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के भोपाल स्थित क्षेत्रीय कार्यालय से अनुमति मिल चुकी है। अनुमति मिलने के बाद शुक्रवार से पेड़ों की कटाई का काम शुरू कर दिया गया।
इससे पहले 5,157.34 हेक्टेयर वन क्षेत्र का सर्वे किया गया था। सर्वे के बाद गत जून-जुलाई में साल बोरर कीटों को नष्ट करने के लिए ट्रैप-ट्री ऑपरेशन चलाया गया था।
मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक की पहचान घने साल के जंगलों, जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए है। यहां स्थित मैकल पर्वत पूरी तरह से जंगलों से घिरा हुआ है।
वन मंडलाधिकारी डेविड वेंकटेश चिनाब ने बताया कि जंगल के अन्य पेड़ों को सुरक्षित रखने के लिए कीटों से प्रभावित पेड़ों को काटना जरूरी है। कटाई के बाद लकड़ी शहडोल वन डिपो भेजी जाएगी। इसके बाद प्रभावित क्षेत्र में पौधरोपण कराया जाएगा।
गत 24 सितंबर को डिंडौरी जिले में साढ़े 19 लाख साल बोरर कीटों को जलाकर नष्ट किया गया था। वर्तमान में डिंडौरी में इन कीटों से प्रभावित डेढ़ लाख साल के पेड़ों की कटाई की जा रही है। वन विभाग ने इससे चार अरब रुपये की आय के नुकसान का अनुमान लगाया है।
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