केएमपी एक्सप्रेसवे पर कोहरे ने मचाया कहर, 22 वाहन टकराए, 22 घायल

बहादुरगढ़। शनिवार सुबह घने कोहरे ने सड़कों पर हालात बेहद खतरनाक बना दिए। दृश्यता कम होने के कारण इलाके में अलग-अलग स्थानों पर कई सड़क दुर्घटनाएं हुईं। सबसे गंभीर स्थिति KMP एक्सप्रेसवे पर बहादुरगढ़ के पास देखने को मिली, जहां करीब 10 किलोमीटर के दायरे में तीन अलग-अलग जगहों पर कुल 22 वाहन आपस में भिड़ गए।
इन हादसों में करनाल जिले के असंध क्षेत्र में अस्पताल संचालित करने वाले एक डॉक्टर के परिवार की सफारी कार कंटेनर ट्रक के नीचे फंसकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इस वाहन में सवार डॉक्टर दंपति, उनके दो बच्चे और अन्य लोगों समेत कुल नौ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
लगातार हुई दुर्घटनाओं के चलते KMP एक्सप्रेसवे पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे वाहन चालकों को घंटों तक परेशानी झेलनी पड़ी। स्थिति संभालने के बाद सड़क को आंशिक रूप से साफ किया गया। दोपहर तक विभिन्न हादसों में घायल 22 लोगों को बहादुरगढ़ के ट्रॉमा सेंटर लाया गया, जिनमें से दस की हालत गंभीर होने पर उन्हें अन्य अस्पतालों में रेफर कर दिया गया।
कुछ घायल अपने परिजनों के साथ निजी अस्पतालों में चले गए, जबकि हल्की चोट वाले लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। पूरे दिन इलाके में घना कोहरा छाया रहा, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रही।
बहादुरगढ़ के मांदोठी और बुपनिया के बीच हुए एक बड़े हादसे में 14 वाहन टकरा गए, जिनमें सात कंटेनर ट्रक, पांच कारें और दो ट्रेलर शामिल थे। कंटेनर के नीचे दबी सफारी में असंध निवासी अस्पताल संचालक डॉ. राजेश, उनकी पत्नी डॉ. मीनाक्षी, सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी जोगिंदर, परिवार के सदस्य आशुतोष, मंजुला, दो बच्चे रिशु और रवि, चालक मनजीत और रोहित सवार थे। सभी को गंभीर चोटें आने के कारण दूसरे अस्पतालों में रेफर किया गया।
इसके अलावा असाउधा ले-बाय और रेलवे क्रॉसिंग के पास भी दुर्घटनाएं हुईं, जहां कुल आठ वाहन आपस में टकरा गए। ट्रॉमा सेंटर लाए गए अन्य घायलों में विकास, उमेश, शिवप्रकाश, कंवरपाल, अंकित, सुधीर, सुरेंद्र, मध्य प्रदेश के हातिम और बल्लू सिंह, बहादुरगढ़ निवासी जतिन, ट्रक चालक सोनू व सिकंदर और हेल्पर आदित्य शामिल हैं। इनमें से कई को मामूली चोटें आईं।
सूचना मिलते ही KMP ट्रैफिक पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। बाद में क्रेन की सहायता से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर यातायात बहाल किया गया। एक साथ बड़ी संख्या में घायलों के पहुंचने से ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को लगातार उपचार कार्य में जुटना पड़ा।
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