गंगा इफ्तार पार्टी विवाद: हाई कोर्ट ने 6 और आरोपियों को दी जमानत

प्रयागराज में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी में गंगा नदी में इफ्तार के दौरान कथित तौर पर मांसाहारी भोजन के अवशेष और कचरा फेंकने के मामले में छह अन्य आरोपियों को भी जमानत दे दी है। इनमें दानिश सैफी, नूर इस्लाम, आमिर कैफ़ी, महफूज आलम, मोहम्मद अहमद और मोहम्मद अव्वल शामिल हैं।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ल की एकल पीठ ने पारित किया। इससे पहले इसी मामले में अन्य आरोपियों को भी अलग-अलग पीठों द्वारा जमानत प्रदान की जा चुकी है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि गंगा केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि पूरे समाज की आस्था से जुड़ी हुई नदी है। साथ ही कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपियों ने अपने कथित कृत्य पर खेद जताया है और भविष्य में ऐसी घटना न दोहराने का आश्वासन दिया है।
राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने आशंका जताई थी कि यह घटना किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकती है और इससे धार्मिक तनाव फैलाने की कोशिश की गई होगी। हालांकि अदालत ने कहा कि जांच प्रक्रिया आरोपी को जेल में रखे बिना भी आगे बढ़ाई जा सकती है।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपियों की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है और वे पहले ही काफी समय से न्यायिक हिरासत में हैं। इन्हीं तथ्यों को देखते हुए उन्हें जमानत का लाभ दिया गया।
मामले के अनुसार, 16 मार्च को वाराणसी के कोतवाली थाने में एक शिकायत दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि 15 मार्च को नाव पर इफ्तार के दौरान गंगा में अपशिष्ट और मांस के अवशेष फेंके गए, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था।
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