ग्राम पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का आदेश, तीन महीने में कराना होगा मतदान

HIGHLIGHTS
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन महीने के भीतर ग्राम पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया।
- चुनाव होने तक निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक बने रहेंगे।
- मतदाता पुनरीक्षण के दौरान 2,32,24,805 नए नाम जोड़े गए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में बुधवार को ग्राम पंचायत चुनाव से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई। अदालत ने निर्देश दिया कि तीन महीने के अंदर पंचायत चुनाव कराए जाएं। तब तक निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के तौर पर काम करते रहेंगे।
प्रयागराज के इम्तियाज हुसैन और अन्य याचिकाकर्ताओं ने समय पर चुनाव कराने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच ने की। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने शाम 4 बजे फैसला सुनाया।
अदालत के आदेश के मुताबिक, तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने होंगे और तब तक मौजूदा ग्राम प्रधान प्रशासक की जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। फैसला खुली अदालत में सुनाया गया है, हालांकि फिलहाल आदेश अपलोड नहीं किया गया है।
तीन महीने में चुनाव कराना निर्वाचन आयोग के सामने चुनौती
पंचायत चुनाव में देरी और निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने का मामला अदालत में विचाराधीन था। अब हाईकोर्ट की ओर से तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिए जाने के बाद राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के सामने निर्धारित समय में चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की चुनौती होगी। विस्तृत आदेश अपलोड होने के बाद फैसले से जुड़ी अन्य शर्तों और निर्देशों की जानकारी स्पष्ट हो सकेगी।
2.32 करोड़ नए मतदाता जुड़े
पंचायत चुनाव को देखते हुए मतदाता पुनरीक्षण अभियान के दौरान 2,32,24,805 नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए। वहीं, 2,03,23,287 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। हटाए गए नामों में मृतक और दूसरी जगह विस्थापित हो चुके मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा डुप्लीकेट और फर्जी मतदाताओं के नाम भी हटाए गए।
पुनरीक्षण के बाद मतदाताओं की संख्या में कुल 29,01,518 की वृद्धि हुई। अब प्रदेश में कुल 12,58,51,570 मतदाता हैं, जो गांव की सरकार चुनने में अपनी भूमिका निभाएंगे।
अनंतिम सूची जारी होने के बाद बदले मतदाताओं के आंकड़े
पहले जारी की गई अनंतिम सूची के अनुसार, प्रदेश में 1.81 करोड़ नए मतदाता जुड़े थे, जबकि 1.41 करोड़ नाम हटाए गए थे। उस समय कुल मतदाताओं की संख्या में 40.19 लाख की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
दावे और आपत्तियां मिलने के बाद आंकड़ों में बड़ा बदलाव सामने आया। नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाने और कुल मतदाताओं की संख्या में वृद्धि के आंकड़े बदल गए। अंतिम सूची में अनंतिम सूची की तुलना में करीब 51 लाख अधिक नए मतदाता जुड़े, जबकि लगभग 62 लाख ज्यादा नाम हटाए गए। इसके चलते मतदाताओं की कुल संख्या में हुई बढ़ोतरी अनंतिम सूची के मुकाबले घटकर 29 लाख रह गई।
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