कैसरबाग अतिक्रमण पर हाईकोर्ट सख्त, पुलिस बल उपलब्ध कराने के निर्देश

लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कैसरबाग स्थित जिला न्यायालय परिसर के आसपास अधिवक्ताओं द्वारा किए गए कथित अतिक्रमण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि नगर निगम को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए, ताकि अभियान बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके।
न्यायालय ने इस मामले में 25 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर संबंधित अधिकारियों से विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने को भी कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने अनुराधा सिंह सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
नगर निगम द्वारा अदालत में दाखिल रिपोर्ट में बताया गया है कि संबंधित क्षेत्र में कुल 72 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं, जिनमें अधिकांश अधिवक्ताओं के चैंबर और अवैध दुकानें शामिल हैं। इससे पहले अदालत ने नगर निगम को निर्देश दिया था कि अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया जाए और जरूरत पड़ने पर पुलिस बल तुरंत उपलब्ध कराया जाए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने पुलिस विभाग की ओर से भेजे गए पत्रों को अदालत में प्रस्तुत किया। इन पत्रों में बताया गया कि किन प्रशासनिक कारणों से निर्धारित तिथि पर नगर निगम को पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध नहीं कराया जा सका।
नगर निगम ने अदालत को सूचित किया कि अतिक्रमण हटाने के लिए अब 12 मई की नई तिथि तय की गई है। इस पर अदालत ने कहा कि भले ही पिछली तिथि पर कुछ कारणों से पुलिस बल उपलब्ध नहीं हो सका, लेकिन अगली निर्धारित तारीख पर पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अदालत ने प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने और 15 दिनों के भीतर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि कैसरबाग क्षेत्र सहित आसपास के कई महत्वपूर्ण सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों के आसपास अतिक्रमण के कारण आम जनता को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पहले की सुनवाई में अदालत ने एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा था कि अतिक्रमण के कारण एंबुलेंस तक नहीं निकल पाई थी, जिससे एक मरीज की जान चली गई थी।
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों से अतिक्रमण हटाने में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी और प्रशासन को इस मामले में जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई करनी होगी।
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