मेरठ के चर्चित सर्पदंश हत्याकांड में पत्नी और प्रेमी दोषी, अदालत ने सुनाई मौत की सजा

HIGHLIGHTS
- अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर की अदालत में मामले की सुनवाई हुई।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अमित की मौत का कारण दम घुटना बताया गया था।
- पुलिस जांच में घटना के 24 घंटे के भीतर रविता और अमरदीप के बीच 51 बार फोन पर बातचीत का पता चला।
मेरठ के बहसूमा क्षेत्र के गांव अकबरपुर सादात निवासी अमित कश्यप उर्फ मिक्की कश्यप की हत्या के मामले में अदालत ने उसकी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। मेरठ के चर्चित सर्पदंश हत्याकांड में दोनों को पहले ही हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराया गया था। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-12) जयवीर सिंह नागर की अदालत में हुई।
अमित की हत्या को सांप के काटने से हुई मौत का रूप देने की कोशिश की गई थी। शुरुआत में परिजनों को भी बताया गया था कि उसकी मौत सर्पदंश से हुई है। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच में हत्या की बात सामने आई। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों के बयान दर्ज कराए।
अदालत ने मनुस्मृति और सावित्री का किया उल्लेख
सजा सुनाने से पहले न्यायाधीश ने मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए कहा कि अधर्म कभी धर्म पर विजय नहीं पा सकता। अदालत की टिप्पणी में सावित्री का उदाहरण भी दिया गया, जो यमराज से भिड़ गई थीं।
अमित की मां बोलीं- अब मिला न्याय
फैसला सुनाए जाने के बाद अमित की मां मुनेश देवी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उनके बेटे के साथ जिस तरह की घटना हुई, उसी तरह आरोपियों को फांसी की सजा मिली है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें न्याय मिला है।
बिस्तर पर मिला था शव, नीचे दबा था जिंदा सांप
यह घटना 13 अप्रैल 2025 की है। उस सुबह अमित कश्यप का शव उसके बिस्तर पर मिला था। शव के नीचे एक जिंदा घोड़ा पछाड़ सांप दबा हुआ था। अमित के शरीर पर सांप के काटने के 10 निशान भी थे। उसकी पत्नी रविता ने दावा किया था कि अमित की मौत सांप के काटने से हुई है।
शुरुआत में परिजनों ने भी मौत को सर्पदंश का मामला माना, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना बताई गई। रिपोर्ट के अनुसार, अमित का गला, नाक और मुंह दबाया गया था। दम घुटने से उसकी मौत हुई थी। गला दबाने के कारण गर्दन की हायॉइड हड्डी और थायरॉइड कार्टिलेज भी टूट गए थे।
पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई कि घटना के 24 घंटे के भीतर रविता और अमरदीप के बीच फोन पर 51 बार बातचीत हुई थी। इन तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच हत्या के पहलू से आगे बढ़ाई।
प्रेम संबंधों में बाधा बनने पर हत्या की साजिश
पुलिस जांच के मुताबिक, रविता और अमरदीप के बीच प्रेम संबंध थे। कुछ दिन पहले परिजनों ने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। अमित को इसकी जानकारी हुई तो उसने विरोध किया। पुलिस के अनुसार, दोनों ने अमित को अपने संबंधों में बाधा मानते हुए उसकी हत्या की साजिश रची।
जांच में सामने आया कि 12 अप्रैल 2025 की रात जब अमित सो रहा था, तब उसके दोनों हाथ पकड़े गए और उसका गला घोंट दिया गया। इसके बाद हत्या को सर्पदंश से हुई मौत दिखाने के लिए उसके बिस्तर पर जिंदा सांप छोड़ दिया गया।
पुलिस के मुताबिक, अमरदीप ने माता के जागरण का बहाना बनाकर सपेरे कृष्ण से एक हजार रुपये में सांप खरीदा था। कृष्ण यह सांप अपने नाना प्रीतमनाथ से लेकर आया था। जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने 26 जून 2025 को अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया था।
भाई की शिकायत पर दर्ज हुआ था मुकदमा
अमित कश्यप अपने पड़ोसी और दोस्त अमरदीप के साथ टाइल्स और पत्थर लगाने का काम करता था। अमित के भाई मोनू कश्यप ने 16 अप्रैल 2025 को रविता और अमरदीप के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने साक्ष्य जुटाकर मामले की जांच पूरी की।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 12 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इनमें मृतक का भाई मोनू, मां मुनेश देवी, कृष्ण, सपेरा प्रीतमनाथ, दरोगा पंकज गौतम, चिकित्सक डॉ. कपिल गर्ग और विवेचक इंदु वर्मा समेत अन्य गवाह शामिल थे।
अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद रविता और अमरदीप को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी माना। इसके बाद दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। अमित की मां मुनेश देवी ने भी दोषियों को फांसी देने की मांग की थी।
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