ब्रिटेन से वापस आएगी वाग्देवी की प्रतिमा, भारत ने तेज किए राजनयिक प्रयास

HIGHLIGHTS
- भोजशाला से जुड़ी सफेद संगमरमर की प्रतिमा 11वीं शताब्दी की बताई गई है
- मध्य प्रदेश सरकार ने प्रतिमा वापसी के लिए केंद्र से किया था अनुरोध
- केंद्र सरकार ब्रिटिश संग्रहालय के साथ लगातार संपर्क में है
भोपाल। धार की ऐतिहासिक भोजशाला से करीब एक सदी पहले ब्रिटेन ले जाई गई 11वीं शताब्दी की देवी वाग्देवी की सफेद संगमरमर की प्रतिमा को वापस लाने के लिए भारत ने राजनयिक स्तर पर प्रयास तेज कर दिए हैं।
केंद्र सरकार मध्य प्रदेश सरकार के अनुरोध और उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद लंदन संग्रहालय के साथ लगातार संपर्क में है। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि 2014 के बाद से 650 से अधिक प्राचीन कलाकृतियों को सफलतापूर्वक भारत वापस लाने के अभियान में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ सकती है।
भोपाल में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में उठेगा मुद्दा
धार की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़ी देवी वाग्देवी की प्रतिमा की वापसी का मुद्दा भोपाल में आयोजित ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह और संस्कृति मंत्रियों की बैठक में प्रमुख स्थानीय और सांस्कृतिक विषय रहेगा।
भारत इस चार दिवसीय सम्मेलन के माध्यम से औपनिवेशिक काल के दौरान चोरी, तस्करी या अवैध तरीके से विदेश ले जाई गई मूर्तियों, शिल्प और प्राचीन कलाकृतियों को वापस लाने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत वैश्विक रणनीति और सहयोग ढांचा तैयार करने की कोशिश करेगा।
प्रतिमा की वापसी पर टिकी निगाहें
मध्य प्रदेश के लिए यह मुद्दा वैश्विक स्तर पर चल रही बहस के बीच एक अहम और भावनात्मक विषय बना हुआ है। अब सवाल यह है कि क्या ब्रिटेन के लंदन संग्रहालय में रखी देवी वाग्देवी के रूप में पूजी जाने वाली प्रतिमा आखिरकार धार वापस आ सकेगी।
केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार से अनुरोध मिलने के बाद केंद्र सरकार ने राजनयिक और संस्थागत माध्यमों से लगातार संपर्क बनाए रखा है।
एमपी सरकार ने केंद्र को भेजा था पत्र
विवेक अग्रवाल ने कहा कि केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय में सचिव का पद संभालने के तुरंत बाद मध्य प्रदेश सरकार ने पत्र लिखकर ब्रिटिश संग्रहालय में रखी देवी वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने का अनुरोध किया था।
उन्होंने कहा कि इसके बाद से केंद्र सरकार राजनयिक चैनलों के साथ-साथ संग्रहालय स्तर पर भी लगातार इस दिशा में काम कर रही है।
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