संसद को जानकारी दिए बिना विदेश यात्रा? रिजिजू ने राहुल गांधी पर बोला हमला

HIGHLIGHTS
- केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर सवाल उठाए हैं।
- उन्होंने कहा कि सांसदों के लिए विदेश यात्रा पर जाने से पहले निर्धारित नियमों के तहत सूचना देना जरूरी होता है, और इस प्रक्रिया का पालन नहीं होने पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
- रिजिजू ने कहा कि नियमों के अनुसार हर सांसद को अपनी प्रस्तावित विदेश यात्रा की जानकारी कम से कम तीन सप्ताह पहले लोकसभा या राज्यसभा सचिवालय को देना अनिवार्य है।
- उन्होंने स्पष्ट किया कि…
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सांसदों के लिए विदेश यात्रा पर जाने से पहले निर्धारित नियमों के तहत सूचना देना जरूरी होता है, और इस प्रक्रिया का पालन नहीं होने पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
रिजिजू ने कहा कि नियमों के अनुसार हर सांसद को अपनी प्रस्तावित विदेश यात्रा की जानकारी कम से कम तीन सप्ताह पहले लोकसभा या राज्यसभा सचिवालय को देना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अनुमति लेने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि केवल सूचना देने का नियम है।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, यदि कोई सांसद विदेश में किसी संस्था या संगठन का आतिथ्य स्वीकार करता है, तो उसका खर्च फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) के तहत संबंधित एजेंसियों द्वारा दर्ज किया जाता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी 2004 से सांसद हैं और इस दौरान उनकी कई विदेश यात्राओं का रिकॉर्ड मौजूद है।
रिजिजू ने कहा कि केवल यात्राओं की संख्या ही नहीं, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कोई सांसद विदेश में कितने दिन रुका और उन यात्राओं पर कितना खर्च हुआ। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस से अपील की कि वे नियमों के अनुसार सभी आवश्यक जानकारी संबंधित विभागों को उपलब्ध कराएं।
उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी सांसद को विदेशी आमंत्रण मिलता है या वह किसी आयोजन में शामिल होता है, तो इसकी जानकारी पहले से देनी होती है। साथ ही, यह भी बताना जरूरी है कि खर्च किसने वहन किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के कानून सभी के लिए समान हैं और उनका पालन हर जनप्रतिनिधि को करना चाहिए।
रिजिजू ने यह भी कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि सरकार का उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं बल्कि नियमों के पालन को सुनिश्चित करना है।
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