जादवपुर यूनिवर्सिटी में यज्ञ पर घमासान, BMS के समर्थन में ABVP; JUTA ने उठाए सवाल

HIGHLIGHTS
- बीएमएस ने अरबिंदो भवन के सामने सांकेतिक यज्ञ का आयोजन किया।
- संगठन ने इसे यूनिवर्सिटी प्रशासन की कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध बताया।
- बीएमएस ने रजिस्ट्रार और फाइनेंस ऑफिसर के पद पर बने रहने को लेकर सवाल उठाए।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की जादवपुर यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को हुए सांकेतिक ‘यज्ञ’ को लेकर विवाद बढ़ गया है। आरएसएस से जुड़े संगठन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन अरबिंदो भवन के सामने यज्ञ किया। संगठन ने इसे यूनिवर्सिटी प्रशासन में कथित अनियमितताओं के विरोध का तरीका बताया।
वहीं, यूनिवर्सिटी के शिक्षकों के संगठन जादवपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (जेयूटीए) ने इस आयोजन पर कड़ा विरोध जताया है। जेयूटीए का कहना है कि अगर कैंपस में इस तरह के धार्मिक आयोजनों की शुरुआत होती है, तो भविष्य में अन्य धार्मिक समूह भी अपने कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मांग सकते हैं। इससे यूनिवर्सिटी के शैक्षणिक माहौल पर असर पड़ने की आशंका है।
प्रशासन के खिलाफ यज्ञ, क्या है विवाद?
बीएमएस ने शुक्रवार को अरबिंदो भवन के सामने सांकेतिक यज्ञ का आयोजन किया। संगठन के अनुसार, यह प्रदर्शन यूनिवर्सिटी प्रशासन में कथित अनियमितताओं के खिलाफ किया गया।
बीएमएस ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार और फाइनेंस ऑफिसर 60 वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद भी अपने पदों पर बने हुए हैं। संगठन का कहना है कि इससे युवाओं के रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
आयोजकों के मुताबिक, यज्ञ के माध्यम से यूनिवर्सिटी के विकास और अधिकारियों में ‘सद्बुद्धि’ आने की प्रार्थना की गई। इसके साथ ही अथॉरिटी पर बने ‘नकारात्मक प्रभाव’ को दूर करने की बात भी कही गई।
प्रशासन ने आयोजन पर जताई आपत्ति
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी यज्ञ के तरीके पर आपत्ति जताई है। कार्यवाहक रजिस्ट्रार सेलिम बॉक्स मोंडल ने हेरिटेज बिल्डिंग के सामने बिना अनुमति आग जलाए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने घटना की रिपोर्ट कुलपति को भेज दी है।
वहीं, इंजीनियरिंग के कई छात्रों ने आयोजन को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता जताई है। छात्र इस मामले में कुलपति चिरंजीव भट्टाचार्य को लिखित शिकायत सौंपेंगे।
जेयूटीए ने धार्मिक आयोजन को लेकर जताई चिंता
जादवपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन ने यज्ञ के आयोजन का विरोध किया है। जेयूटीए के अनुसार, यूनिवर्सिटी परिसर में पहले सरस्वती पूजा, विश्वकर्मा पूजा और इफ्तार जैसे कार्यक्रम होते रहे हैं, लेकिन किसी विशेष धार्मिक प्रार्थना का आयोजन अलग विषय है।
शिक्षक संगठन का कहना है कि यदि एक धार्मिक समूह को इस तरह का आयोजन करने की अनुमति दी जाती है तो भविष्य में दूसरे समूह भी इसी तरह की अनुमति मांग सकते हैं। ऐसी स्थिति में प्रशासन के लिए किसी एक समूह को अनुमति देकर दूसरे को रोकना मुश्किल हो सकता है।
जेयूटीए ने सवाल उठाया कि यदि भविष्य में अलग-अलग धार्मिक समूह यूनिवर्सिटी परिसर में अपने कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मांगते हैं, तो प्रशासन उन्हें किस आधार पर रोक पाएगा।
एबीवीपी ने किया यज्ञ का समर्थन
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने यज्ञ के आयोजन का समर्थन किया है। एबीवीपी ने वामपंथी छात्र संगठनों के पुराने ‘आजादी’ वाले नारों का जिक्र करते हुए कहा कि इस यज्ञ से कैंपस ‘पवित्र’ हुआ है।
इस तरह यज्ञ को लेकर यूनिवर्सिटी में अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। बीएमएस इसे प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ विरोध बता रहा है, जबकि एबीवीपी ने इसका समर्थन किया है। दूसरी ओर, जेयूटीए इसे कैंपस में धार्मिक गतिविधियों के विस्तार की शुरुआत के रूप में देख रहा है।
जेयूटीए ने कहा- असली मुद्दों से भटक रहा ध्यान
जेयूटीए का कहना है कि यज्ञ को लेकर विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब यूनिवर्सिटी कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है। शिक्षक संगठन ने रिसर्च फंड की कमी, पुरानी इमारतों की खराब स्थिति और मरम्मत के लिए पैसों की कमी जैसे मुद्दों को ज्यादा महत्वपूर्ण बताया।
जेयूटीए का मानना है कि इस तरह के विवादों से इन बुनियादी समस्याओं से ध्यान हट रहा है। शिक्षक संगठन ने पढ़ाई के समय शैक्षणिक क्षेत्रों में इस तरह के आयोजन नहीं करने की अपील की है।
यज्ञ को लेकर तीन अलग-अलग रुख
जादवपुर यूनिवर्सिटी में इस मामले को लेकर फिलहाल तीन अलग-अलग पक्ष सामने हैं। बीएमएस यज्ञ को प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ विरोध बता रहा है। एबीवीपी ने इसका समर्थन किया है। वहीं, जेयूटीए धार्मिक आयोजन को लेकर भविष्य में कैंपस में उत्पन्न होने वाली संभावित स्थिति पर सवाल उठा रहा है।
अब देखना होगा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन इस आयोजन को लेकर क्या कदम उठाता है और भविष्य में कैंपस में ऐसे धार्मिक आयोजनों की अनुमति दी जाती है या नहीं।
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