जयराम रमेश ने धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ दिया विशेषाधिकार हनन का नोटिस

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने सोमवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दाखिल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री ने संसद और उसकी स्थायी समितियों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां की हैं। यह नोटिस राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन को सौंपा गया।
जयराम रमेश के अनुसार, 15 मई को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में धर्मेंद्र प्रधान ने संसद की स्थायी समिति को लेकर ऐसी टिप्पणियां कीं, जिन्हें संसदीय परंपराओं के खिलाफ माना जा सकता है। यह प्रेस वार्ता नीट-यूजी 2026 परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद आयोजित की गई थी। रमेश ने कहा कि मंत्री के बयान संसद और संसदीय समितियों के प्रति उनकी असम्मानजनक सोच को दर्शाते हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि राज्यसभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमावली के नियम 187 के तहत यह नोटिस दिया गया है। उनका आरोप है कि शिक्षा मंत्रालय में लगातार बढ़ रही अव्यवस्था के बीच मंत्री की टिप्पणियां स्थिति को और गंभीर बनाती हैं, जिसका असर देश के लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है।
दरअसल, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने शिक्षा मंत्री से पूछा था कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को लेकर संसदीय स्थायी समिति द्वारा दी गई सिफारिशों को अब तक लागू क्यों नहीं किया गया। इस पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि वह स्थायी समिति की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया नहीं देंगे और केवल विशेषज्ञों की उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट पर बात करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि संसदीय समितियों में विपक्षी दलों के सदस्य होते हैं, इसलिए कई बातें एक खास नजरिए से लिखी जाती हैं।
जयराम रमेश ने इन बयानों को “अपमानजनक” बताते हुए कहा कि इससे सांसदों और संसदीय समितियों की साख को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई है। उन्होंने कहा कि संसदीय समितियां लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं और उन्हें अक्सर “मिनी पार्लियामेंट” कहा जाता है। ऐसे में किसी समिति की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना संसद की गरिमा को चुनौती देने जैसा है।
रमेश ने अपने नोटिस में यह भी उल्लेख किया कि संसद की समितियों या उनके सदस्यों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी को सदन की अवमानना माना जाता है। उनके मुताबिक, शिक्षा मंत्री का व्यवहार विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना के दायरे में आता है।
कांग्रेस नेता ने राज्यसभा सभापति से मांग की है कि इस मामले में धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ उचित विशेषाधिकार कार्रवाई शुरू की जाए।
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