पश्चिम एशिया संकट के बीच चौथी बार हुई जयशंकर-अराघची की बातचीत

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में हाल ही में शुरू हुए तनाव के बीच भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। यह दोनों नेताओं के बीच इस संकट के दौरान चौथी बातचीत है। बातचीत का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करना था।
पश्चिम एशिया संकट के बीच लगातार संवाद
विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर और अराघची ने पिछले 15 दिनों में चार बार संपर्क किया है। पहला संपर्क 28 फरवरी को हुआ था, जब अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया था। इसके बाद 5 मार्च और 10 मार्च को भी दोनों नेताओं ने बातचीत की थी, और गुरुवार रात हुई वार्ता चौथी बार हुई।
होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित मार्ग की पहल
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर बताया कि बातचीत में द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ ब्रिक्स से जुड़े सहयोग के विषयों पर भी चर्चा हुई। भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक मार्ग को भारतीय व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास किए हैं। अमेरिकी और इस्राइली हमलों के बाद ईरान ने इस मार्ग को आंशिक रूप से अवरुद्ध कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका उत्पन्न हुई थी। हालांकि गुरुवार को खबर आई कि एक भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से भारत पहुंच गया, जिसे कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
ईरानी बयान और ब्रिक्स पर जोर
ईरान की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अराघची ने जयशंकर को अमेरिका और इस्राइल के हमलों के प्रभाव और इसके क्षेत्रीय तथा वैश्विक सुरक्षा पर परिणामों से अवगत कराया। उन्होंने तेहरान के आत्मरक्षा के वैध अधिकार के प्रयोग और इसके प्रति दृढ़ संकल्प पर भी जोर दिया।
बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि अराघची ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मंचों पर ईरान के खिलाफ सैन्य आक्रमण की निंदा करने की जरूरत पर बल दिया और ब्रिक्स को बहुपक्षीय सहयोग के लिए अहम मंच बताया। उन्होंने मौजूदा समय में ब्रिक्स की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि यह क्षेत्र और विश्व में स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
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